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वीआईटी चेन्नई और वेलिओ के बीच समझौता

वीआईटी चेन्नई और वेलिओ के बीच हाल ही में एक समझौता हुआ है। समझौता पत्र पर वीआईटी के उपाध्यक्ष जीवी सेल्वम और वेलिओ के शोध व विकास के...
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Agreement between VIT Chennai and Velio

Agreement between VIT Chennai and Velio

चेन्नई।वीआईटी चेन्नई और वेलिओ के बीच हाल ही में एक समझौता हुआ है। समझौता पत्र पर वीआईटी के उपाध्यक्ष जीवी सेल्वम और वेलिओ के शोध व विकास के निदेशक जजी विजयरामन ने समझौता किया। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य उद्योग अकादमिक संपर्क करना और दोनों को विभिन्न तरीकों से फायदा पहुंचाना है।

वीआईटी अब इंजीनियरिंग में जिसमें ऑटोमेटिव मेकाट्रोनिक्स जो उभरता क्षेत्र है उसमें मास्टर्स डिग्री देगा। शोध एवं विकास के क्षेत्र में प्रायोगिक ज्ञान के लिए और कंपनी के कर्मचारियों के लिए संस्थान में तकनीकी विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस समझौते से संस्थान के छात्र अब वेलिओ कंपनी में इंटर्नशिप कर सकेंगे। कंपनी संस्थान में एक प्रयोगशाला स्थापित करेगी। इस प्रयोगशाला में संस्थान के विद्यार्थी कंपनी कर्मियों के साथ काम करेंगे। इस मौके पर वीआईटी चेन्नई के वाइसचांसलर डा. एन. संबनधम, डीन अकादमिक डा. वीएस कंचना समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।

बलात्कार पीडि़ता मेडिकल बोर्ड की सहमति के बिना करा सकती है गर्भपात

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि बलात्कार की पीडि़ता को गर्भपात कराने के लिए मेडिकल बोर्ड या न्यायपालिका का रुख करने की जरूरत नहीं है बशर्ते भ्रूण 20 हफ्ते का नहीं हुआ हो। न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने एक पीडि़ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पीडि़ता द्वारा अनचाहे गर्भ का सामना करने के सभी मामलों में अगर गर्भावस्था की अवधि 20 हफ्ते से ज्यादा नहीं हुई हो तो उसे मेडिकल बोर्ड के पास भेजे जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने आदेश में कहा, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून, 1971 की धारा तीन के प्रावधानों के तहत गर्भपात कराया जा सकता है। पीडि़ता को बेवजह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

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