
Super El Nino 2026
WMO IMD El Nino Prediction: मौसम का मिजाज अब सिर्फ बदल नहीं रहा, बल्कि वह रौद्र रूप धारण करने की कगार पर है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मिलकर साल 2026 को 'सुपर अल नीनो' (Super El Nino) वर्ष घोषित कर दिया है। यह सिर्फ एक वैज्ञानिक घोषणा नहीं है, बल्कि धरती पर आने वाले एक बड़े संकट की घंटी है। इस भयानक खतरे से दुनिया को आगाह करने के लिए तमिलनाडु के रामेश्वरम में समंदर की रेत पर एक बेमिसाल कलाकृति के जरिए इंसानी चेतना को झकझोरने की कोशिश की गई है।
मूर्तिकार सरवनन ने कहा कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने संयुक्त रूप से वर्ष 2026 को 'सुपर एल नीनो' का वर्ष घोषित किया है। इसका कृषि पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। समुद्र में मौजूद प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) अपनी प्राकृतिक विशेषताएं खो देंगी और मत्स्य पालन भी प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि इन संभावित प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए, रामनाथपुरम जिला प्रशासन के जिलाधिकारी के निर्देश पर और रामेश्वरम नगर पालिका के आयुक्त के सहयोग से मैं रेत की मूर्ति (सैंड स्कल्प्चर) बनाकर लोगों को जागरूक कर रहा हूं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अल नीनो को लेकर एक चेतावनी जारी है। WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच अल नीनो तेजी से मजबूत होगा। इसके चलते भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में लू, सूखा, भारी बारिश और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
बता दें कि एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर भारत के मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ जाती है। यह घटना आमतौर पर हर 2 से 7 साल में होती है। साथ ही करीब 9 से 12 महीने तक बनी रहती है।
WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि एल नीनो की स्थिति पहले से बन चुकी है और इसके तेजी से मजबूत होने की संभावना है। इससे दुनिया के कई क्षेत्रों में सूखे, भारी वर्षा, हीटवेव और समुद्री हीटवेव का जोखिम बढ़ जाएगा।
Updated on:
05 Jul 2026 10:50 am
Published on:
05 Jul 2026 10:25 am
