
अयोध्या राम मंदिर (फोटो- पत्रिका)
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित दान गबन मामले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस मामले में बड़ा बयान देते हुए अयोध्या पुलिस और जांच अधिकारी (IO) से मांग की है कि वे उन राजनीतिक नेताओं से भी पूछताछ करें, जिन्होंने इस प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए हैं।
VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, AAP सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव जैसे नेताओं ने राम जन्मभूमि मंदिर में कथित दान गबन को लेकर सार्वजनिक बयान दिए हैं। VHP का कहना है कि इन बयानों में कुछ विशेष आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संबंधित नेताओं के पास इस मामले से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसी आधार पर संगठन ने इन सभी से पूछताछ की मांग की है।
आलोक कुमार ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर आरोप लगाता है और उसके समर्थन में कोई तथ्य या प्रमाण नहीं मिलता, तो उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में यह भी जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए कि क्या आरोप पूरी तरह तथ्यों पर आधारित थे या बिना आधार के लगाए गए थे।
VHP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मांग को साझा किया है। संगठन ने बताया कि जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच आवश्यक है।
इस बीच, विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की जांच में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 3 जुलाई को SIT टीम ने अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर का निरीक्षण भी किया था ताकि जांच को और मजबूत किया जा सके। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई को SIT को 15 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए जांच का दायरा और व्यापक करने की अनुमति दी थी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे और किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगेगी।
इस मामले में 25 जून को FIR दर्ज की गई थी। इससे पहले 23 जून को SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल, जांच आगे बढ़ रही है और अयोध्या पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की तैयारी में जुटी हुई है।
Updated on:
05 Jul 2026 11:43 am
Published on:
05 Jul 2026 11:04 am
