
Pandavani legend Teejan Bai (सोर्स- @narendramodi)
Pandavani Teejan Bai Passed Away: भारतीय लोककला जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पांडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रही तीजन बाई पिछले कई सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं। उनके निधन के साथ ही भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया।
तीजन बाई का नाम उन कलाकारों में शुमार किया जाता है जिन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककथा शैली पांडवानी को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पहचान दिलाई। अपनी दमदार आवाज, भावपूर्ण प्रस्तुति और मंच पर जीवंत अभिनय के जरिए उन्होंने महाभारत की कहानियों को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
उनकी प्रस्तुतियों में केवल गायन ही नहीं, बल्कि अभिनय, संवाद और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिलता था। यही वजह रही कि पांडवानी जैसी लोककला सीमित दायरे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंची।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जन्मीं तीजन बाई ने बेहद साधारण परिवेश से अपने सफर की शुरुआत की थी। लोककला के प्रति उनका समर्पण बचपन से ही दिखाई देता था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया कि वह भारतीय लोक संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान बन गईं।
उन्होंने भारत के अलावा कई देशों में पांडवानी की प्रस्तुतियां दीं और विदेशी दर्शकों को भी भारतीय महाकाव्य महाभारत की लोक शैली से परिचित कराया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।
भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें समय-समय पर कई प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपराओं की समृद्ध विरासत का भी सम्मान था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने उनके निधन को कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शोक संतप्त परिवार तथा उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
तीजन बाई का निधन भले ही भारतीय लोककला के लिए एक बड़ी क्षति हो, लेकिन उनकी आवाज, उनकी शैली और उनकी प्रस्तुतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेंगी। उन्होंने अपना पूरा जीवन पांडवानी कला को समर्पित कर दिया और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज भी उनके द्वारा सुनाई गई महाभारत की कथाएं लाखों लोगों की यादों में जीवित हैं।
Updated on:
05 Jul 2026 12:01 pm
Published on:
05 Jul 2026 12:00 pm
