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BJP 850 Lok Sabha Seats Plan: ‘850 सीटों के परिसीमन विधेयक पर भाजपा के पास बहुमत नहीं: संजय राउत

Delimitation Bill India next update : संसद की सीटें बढ़ाने का भाजपा का सपना क्या सिर्फ एक ख्वाब बनकर रह जाएगा? संजय राउत के इस तीखे दावे ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। जानिए क्यों मोदी सरकार के लिए 850 सीटों का नया प्लान गले की फांस बन सकता है।
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Sanjay Raut statement on delimitation

Sanjay Raut statement on delimitation

Sanjay Raut statement on delimitation: देश की संसद में सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लेकिन क्या मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच मोदी सरकार के लिए इस महा-योजना को अमलीजामा पहनाना मुमकिन है? शिवसेना (यूबीटी) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस पर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने दिल्ली से लेकर मुंबई तक की सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राउत का साफ कहना है कि भाजपा के पास इस ऐतिहासिक बदलाव को लागू करने के लिए 'जादुई आंकड़ा' यानी जरूरी बहुमत है ही नहीं।

दरअसल, विपक्षी दलों में टूट और फूट को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना (UBT) के MP संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हालात ऐसे हैं कि आज भी भाजपा के पास 850 सीटों के लिए डिलिमिटेशन बिल लाने के लिए काफी मेजॉरिटी नहीं है, और वह वह मेजॉरिटी हासिल नहीं कर सकती। आप लोगों को कितना भी तोड़ने की कोशिश करें, आप जरूरी मेजॉरिटी हासिल नहीं कर पाएंगे।'

हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने भाजपा को निशाने पर लिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि जिस दिन वे सत्ता से बाहर हो जाएंगे और ये केंद्रीय एजेंसियां हमारे नियंत्रण में आ जाएंगी। भाजपा 10 टुकड़ों में बंट जाएगी।

मानसून सत्र में डिलिमिटेशन बिल पेश कर सकती है सरकार

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार कई बिल पेश करेगी, जिसमें डिलिमिटेशन बिल, 130वां संविधान संशोधन विधेयक और महिला आरक्षण बिल शामिल हैं। सत्र के शुरू होने से पहले ही राजनीतिक बयान आने शुरू हो गए है।

आपको को यहां यह बता दें कि महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। विपक्ष इस विधेयक का समर्थन तो करता है, लेकिन महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध करता रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले संसद सत्र में सरकार आरक्षण से संबंधित परिसीमन विधेयक को संसद से पारित कराने में सफल नहीं हो सकी थी।