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श्रीमद् भागवत कथा में हुआ प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार का प्रसंग

श्रीमद् भागवत कथा

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bhagwat katha

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भगवान की भक्ति में ही शक्ति है। भागवत कथा सही मार्ग दिखाती है, भक्ति करनी है तो ध्रुव और भक्त प्रहलाद जैसी करो। भगवान ने प्रहलाद के लिए अवतार लेकर हिरण्कश्यप का वध किया था। यदि भक्ति सच्ची हो तो ईश्वरीय शक्ति अवश्य सहायता करती है। भागवत कथा सुनना और भगवान को अपने मन में बसाने से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। भगवान हमेशा पने भक्त को पाना चाहते हैं। जितना भक्त भगवान के बिना अधूरा है उतना ही अधूरा भगवान भी भक्त के बिना है।
वृन्दावन वाले पंडित बजरंग शास्त्री महाराज ने अन्नानगर शांति कॉलोनी स्थित श्री रामदयालकलावती खेमका अग्रवाल सभा भवन में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान यह बात कही। श्री अग्रवाल सभा की इकाई श्री अग्रवाल सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा में ध्रुव, भक्त प्रहलाद चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा सुनाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सभी अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें, जिससे वह बुढ़ापे में अपने माता पिता की सेवा कर सकें। गो सेवा, साधु की सेवा कर सकें। मनुष्य को दिखावा नहीं कर भगवान को सच्चे हृदय से याद करना चाहिए।
पंडित बजरंग शास्त्री महाराज ने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते है तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र पुत्र एवं पिता के संबंध को प्रदर्शित करता है और बताता है कि यदि भक्त सच्चा हो तो विपरीत परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं सकता। भयानक राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्यकश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रह्लाद ने अपनी ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी और सच्चे अर्थों में कहा जाए तो प्रह्लाद द्वारा अपने पुत्र होने का दायित्व भी निभाया गया। उन्होंने कहा कि पुत्र का यह सर्वोपरि दायित्व है कि यदि उसका पिता कुमार्गगामी और दुष्ट प्रवृत्ति का हो तो उसे भी सुमार्ग पर लाने के लिए सदैव प्रयास करने चाहिए। प्रह्लाद ने बिना भय के हिरण्यकश्यप के यहां रहते हुए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया और पिता को भी उसकी ओर आने के लिए प्रेरित किया लेकिन राक्षस प्रवृत्ति के होने के चलते हिरण्यकश्यप प्रहलाद की बात को नहीं मानता। ऐसे में भगवान नरसिंह द्वारा उसका संघार हुआ उसके बाद भी प्रह्लाद ने अपने पुत्र धर्म का निर्वहन किया और अपने पिता की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
श्री अग्रवाल सभा के अध्यक्ष इन्द्रराज बंसल ने बताया कि कथा प्रतिदिन सायं 3.30 बजे से 7.30 बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा के तहत 7 अगस्त को श्री कृष्ण बाल लीला, माखन चोरी, गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग का आयोजन किया जाएगा।
श्री अग्रवाल सभा के अध्यक्ष इन्द्रराज बंसल, उपाध्यक्ष सीताराम गोयल व राजेन्द्र गुप्ता, महासचिव जगदीश प्रसाद अग्रवाल, सचिव योगेश बंसल, कोषाध्यक्ष बाबूलाल केडिया, श्री अग्रवाल सत्संग समिति के संरक्षक श्यामसुन्दर गोयनका, समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद गुप्ता, सचिव कमलेश कुमार गुप्ता, सांस्कृतिक समिति चेयरपर्सन कल्पना भालोटिया, सुरेश सांघी, नरेश सांघी, हरिश सांघी, कार्यक्रम के संयोजक रामकिशन अग्रवाल, शिवकुमार गोयनका, सुशील जालान, मिथिलेश गुप्ता, अग्रवाल सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक केडिया, गोविन्द प्रसाद अग्रवाल, मोहनलाल सराफ, सुभाष गुप्ता, प्रवीण गर्ग के साथ ही कामिनी सांघी, संतोष बंसल, सुनीता अग्रवाल, कंचन बंसल, सीमा सांघी, संतोष सांघी, निशा सराफ, कमला चौधरी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।