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भारतीय बच्चों को नई जिंदगी दे रहे हैं विदेशी अभिभावक

Child Adoption : सर्वाधिक दत्तक ग्रहण अमरीका से, बेटियों की चाहत

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भारतीय बच्चों को नई जिंदगी दे रहे हैं विदेशी अभिभावक

भारतीय बच्चों को नई जिंदगी दे रहे हैं विदेशी अभिभावक

चेन्नई. कोरोना महामारी के बाद कई बच्चों ने अपने मां-बाप खो दिए। ऐसे में दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) नीति ने कुछ बच्चों को नई जिन्दगी दी जिससे इन परिवारों को भी रोशनी मिली। भारतीय बच्चों खासकर बेटियों को विदेशी अभिभावक गले लगाने को तैयार हैं। जानकारों के अनुसार एडॉप्शन प्रक्रिया में लगने वाले समय को और कम किया जा सकता है। मद्रास उच्च न्यायालय ने भी हाल में एडॉप्शन से जुड़े एक मामले में मौजूदा नियमों के सरलीकरण की राय रखी थी।

उच्चतम न्यायालय ने भी बीस नवम्बर को कहा था कि सभी राज्यों में किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार नोडल विभागों के प्रभारी सचिव को अनाथों व परित्यक्त अथवा आश्रमों समर्पित कर दिए गए बच्चों की पहचान करने के लिए द्विमासिक पहचान अभियान चलाना चाहिए। ताकि ऐसे बच्चों को देश में गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।

इससे पहले आला अदालत ने ’द टेम्पल ऑफ हीलिंग’ की जनहित याचिका पर सुनवाई की थी जिसके अनुसार भारत में बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए। सालाना देश में केवल 4,000 एडॉप्शन होता है जबकि मोटे अनुमान के तहत 2.82 करोड़ बच्चे यतीम हैं।

एडॉप्शन का कम औसत

केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के पिछले सालों के आंकड़े भी बताते हैं कि 2016 से 2021 के बीच देश में हुए एडॉप्शन का औसत 3270 तो विदेशी अभिभावकों की ओर से अपनाए गए बच्चों की संख्या 539 रही।

विदेशों में एडॉप्शन

विदेशों में एडॉप्शन की बात करें तो 2021-22 में 414 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें 253 बच्चियां और किशोरियां थी। सर्वाधिक बेटियां अमरीका (124) में गोद गईं। अमरीका के बाद इटली (51) दूसरे क्रम पर रहा। बेटों के क्रम में इस दृष्टि से इटली (54) अमरीका (40) से आगे रहा। इसी अवधि में तमिलनाडु से 129 किशोरों और 165 किशोरियों को को गोद लिया गया।

चाइल्ड एडॉप्शन के चार साल के आंकड़े

वर्ष इन कंट्री इंटर कंट्री

2020-21 3142 417

2021-22 2991 414

2022-23 3010 431

2023-24 2248 224

देरी कम करने के उपाय

केन्द्रीय दत्तकंग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने पारदर्शिता लाने व विभिन्न स्तरों पर विलम्ब को कम करने के लिए सीएआरआईएनजीएस नामक एक ऑनलाइन दत्तकग्रहण प्लेटफार्म तैयार किया है। इसे अपेक्षाकृत सरल किया गया है। एडॉप्शन प्रक्रिया में शामिल जटिल औपचारिकताओं की हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है।

- स्मृति जूबिन इरानी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री