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मुख्यमंत्री ने श्रीलंका के नए बिल पर जताई आपत्ति

-कहा, राज्य के मछुआरों हैं इसके निशाने पर

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CM objects to Lanka’s new bill targetting TN fishermen;

CM objects to Lanka’s new bill targetting TN fishermen;


चेन्नई.
मुख्यमंत्री एडपाडी के.पलनीस्वामी ने गुरुवार को राज्य के मछुआरों को लक्ष्य करके पारित किए गए श्रीलंका के नए बिल का विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया है कि वह उच्च कूटनीतिक स्तर कड़ा विरोध दर्ज कराएं। श्रीलंकाई संसद ने फारेन वेसेल्स बिल पारित किया है। श्रीलंकाई सरकार ने दो दिन पहले यह बिल पारित किया था।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे विदेश मंत्रालय एवं श्रीलंकाई स्थित इंडियन मिशन को इस संबंध में निर्देश दें। इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि यह बिल लागू नहीं हो। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि नए बिल में लंबे समय तक मछुआरों को जेल रखे जाने तथा भारी भरकम जुर्माने (करोड़ों रुपए तक) का प्रावधान है। इस बिल के लागू होने के बाद पाल्क बे के पारंपरिक जल में मछली पकडऩे वाले राज्य के मछुआरों की जिंदगी एवं आजीविका श्रीलंकाई सरकार की दया पर निर्भर हो जाएगी। श्रीलंकाई सरकार का यह कदम राज्य के मछुआरों के लिए व्यापक असंतोष का विषय है। यह अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बिल उस समय पारित किया गया है जब दो बार मंत्री स्तरीय वार्ता पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही मत्स्य विभाग का संयुक्त कार्यकारी समूह तीन बार बैठक कर चुका है। ये बैठकें लंबे समय से लंबित एवं संवेदनशील आजीविका के मामले के स्थाई समाधान निकालने के लिए हुई हैं।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार भारत सरकार की मदद से विभिन्न पहल कर रही है। श्रीलंकाई सरकार का यह एकतरफा पहल से राज्य के मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। इससे तमिलनाडु सरकार का सक्रिय प्रयास एवं भारत सरकार का कूटनीतिक प्रयास भी प्रभावित होगा। 1974 के भारत श्रीलंका समझौते के तहत कच्चतीवू को सौंपा गया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री 165 फिशिंग बोट एवं 108 मछुआरों की रिहाई के लिए तत्काल कदम उठाएं।