
रेडजोन के संक्रमित कचरे को शहर से बाहर ले जाने का सबसे छोटा रास्ता बताएगा ये डिवाइस
चेन्नई.कोरोना संक्रमण के कारण शहरों के भीतर अस्पतालों में रेडजोन क्षेत्र में, क्वारांटीन क्षेत्र में खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न हो रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास के स्टार्टअप अंतरीक्ष वेस्ट वेंचर लिमिटेड ने अस्पतालों और क्लीनिक में उत्पन्न कचरे के निस्तारण के लिए एक स्मार्ट बिन सिस्टम विकसित किया है। इसे एयरबिन का नाम दिया गया है। यह आइओटी सिस्टम के माध्यम से दूरस्थ अपशिष्ट संग्रह की निगरानी को संभव बनाता है। इसे कचरे के डिब्बे के ढक्कन, दीवारों या पास के खंभे पर लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी निकायों के हर कचरे के डिब्बे को भरने से पहले खाली करना है। कचरे के निस्तारण की स्मार्ट तकनीक की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए अंतरीक्ष वेस्ट वेंचर लिमिटेड के संस्थापक महक महेन्द्र शाह ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रिया संक्रमण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। आज के समय में दूरस्थ क्षेत्रों में कचरे के डिब्बे के भर जाने से और समय पर उसका निस्तारण न होने से भी कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती है। भरा हुआ या ओवर फ्लो हो रहा कचरे का डिब्बा सभी तरह के रोगो को आमंत्रण देता है। अपशिष्ट संग्रह, परिवहन, पृथक्ककरण, रिसाइकिलिंग और निस्तारण, हर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की जरूरत होती है। दूरस्थ अपशिष्ट स्तर की निगरानी, स्मार्ट पिकअप, कर्मचारियों के लिए सुरक्षा और कौशल विकास , नागरिकों को शिक्षित करना, आगे आने वाले समय में इस प्रबंधन उद्योग को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख तत्व होंगे। एयरबिन के काम करने की प्रक्रिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि इसकी सहयता से दूरस्थ या पहुंच से दूर रखे हुए कचरे के डिब्बे की निगरानी की जा सकेगी। ये कचरे के डिब्बे के ओवरफ्लो होने के पहले ही अलर्ट जारी कर देगा। जिसकी सहायता से कचरे को जल्द खाली करना, परिवहन और निस्तारण के लिए अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया की योजना में सुधार किया जा सकता है। इसकी विशेषता है कि एयरबिन से स्थान, कचरे की श्रेणी, ऑटोमेटेड क्युमुलेटिव रिर्पोट द्वारा श्रेणी,स्थान और प्राथमिकता के आधार पर अपशिष्ट निस्तारण की संचयी (क्युमुलेटिव) रिर्पोट प्राप्त की जा सकती हैं। ये समय समय पर स्वच्छता टीम को कचरे के डिब्बे के भरने के बारे में जानकारी देता रहता है। एयरबिन न सिर्फ रिसाइकिल किए जाने वाले कचरे के बारे में बताएगा बल्कि एक क्लिनिक से दूसरे क्लिनिक तक जाने के लिए कम से कम दूरी कैसे तय की जाए इसकी जानकारी भी देगा। जिससे खतरनाक श्रेणी का कचरा पूरे शहर में घूम कर निस्तारण के लिए न ले जाना पड़े।
आइआइटी मद्रास इन्क्यूबेशन सेल के सहयोग से चल रहे स्टार्ट अप की भूमिका के बारे में बात करते हुए सेल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तमस्वती घोष ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आइआइटी के स्टार्टअप, एन 95 मास्क बनाने, इंट्यूबेशन बॉक्स , सस्ती परिक्षण किट और वेटिंलेटर के निर्माण में लगे हुए हैं। उम्मीद करते है कि इंडस्ट्रीज भी उन्हें सहयोग करेगी। अगले कुछ महीनों में अंतरिक्ष 200 डिवाइस का उत्पाद कर पूरे देश में भेजेगा। स्टार्टअप 100 स्मार्ट सिटी में 100,000 डिवाइस भेजने की तैयारी कर रहा है।
हर पांच साल में दुगुना हो जाता है कचरा
उल्लेखनीय है कि देश में पैदा होने वाले कचरे का सिफ 28 प्रतिशत ही रिसाइकिल हो पाता है। एक अध्ययन में पाया गया कि देश में उत्पन्न होने वाला कचरा हर पांच साल में दुगुना हो जाता है।
Published on:
27 Apr 2020 08:19 pm
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