19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दुनिया में हर साल 2.5 करोड टन कपास की पैदावार, 38 फीसदी योगदान भारत का

दुनिया में हर साल 2.5 करोड टन कपास की पैदावार, 38 फीसदी योगदान भारत का- कपास का कुल बाजार करीब 90 हजार करोड़ रुपए का- विश्व में कपड़े से जुड़ी कच्चे माल की करीब 31 फीसदी जरुरतें पूरी हो रही- कभी बाढ़ तो कभी सूखे से कपास की पैदावार पर पड़ रहा असर

2 min read
Google source verification
cotton

cotton

चेन्नई. कपास की खेती के लिए जलवायु परिवर्तन का खतरा उसके लिए समस्याएं पैदा कर रहा है। कभी सूखे तो कभी बाढ़ के चलते कपास की खेती प्रभावित हो रही है। इन प्राकृतिक आपदाओं से कपास उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। दुनिया भर में हर साल कपास की 2.5 करोड़ टन पैदावार होती है। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कपास उत्पादन वाले देशों में अग्रणी है, जहां हर साल करीब 62 लाख टन कपास पैदा होती है। दुनिया का 38 फीसदी कपास उत्पादक क्षेत्र भारत में ही है। इसके बावजूद देश में इसकी प्रति हेक्टेयर पैदावार अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। अमरीका में इसकी प्रति हेक्टेयर पैदावार 955 किलोग्राम और चीन में 1764 किलोग्राम हैं वहीं भारत में पैदावार 454.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। कपास का कुल बाजार करीब 90 हजार करोड़ रुपए का है। जो विश्व में कपड़े से जुड़ी कच्चे माल की करीब 31 फीसदी जरुरत को पूरा करता है। यही नहीं यह करीब 35 करोड़ लोगों की जीविका का साधन है। इसकी खेती कर रहे 90 फीसदी से ज्यादा किसान छोटे हैं जो 2 हेक्टेयर से कम जमीन पर कपास उगाते हैं। इसका कुल वार्षिक आर्थिक प्रभाव करीब 45 लाख करोड़ रुपए का है।
देश का 12 प्रदेशों में कपास का उत्पादन
भारत में 12 से अधिक राज्य हैं जहाँ कपास का उत्पादन किया जाता है। देश में कपास की ज्यादातर खेती गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, आँध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में होती है। भारत के अलावा कपास की अन्य देशों में भी बहुत मांग होती है। जिसके कारण कपास को सफेद सोने के नाम से जाना जाता है।
उम्दा क्वालिटी के कपड़े
कपास से उम्दा क्वालिटी के कपड़े बनाए जाते हैं। कपास की खेती सूती वस्त्र उद्योग का आधार कही जाती है। वनस्पति, पशु-चर्म तथा कृत्रिम रेशे से तैयार कुल वस्त्रों का आधा से अधिक भाग कपास के रेशे से तैयार किया जाता है। भारत के लिए कपास एक महत्वपूर्ण फसल है, क्योंकि यह राष्ट्रीय कृषि अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देता है।
पैदावार का मौसम घटने की आशंका
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से 50 फीसदी कपास की खेती सूखा तो 20 फीसदी रकबा बाढ़ की चपेट में आ सकता है और इसका असर सभी कपास उत्पादक देशों भारत, अमेरिका, चीन, ब्राजील, पाकिस्तान और टर्की पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार 40 फीसदी कपास उत्पादक क्षेत्रों में पैदावार का मौसम घट सकता है। जिसका मुख्य कारण तापमान में आने वाली वृद्धि है जो कपास उत्पादन के अनुकूल नहीं होगी।