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जल, रेत और पत्थरों का एक साथ अवैध दोहन हुआ तो पर्यावरण को होगा नुकसान

Madras High Court ने अवैध जल निकासी मामले में कोर्ट आयुक्त नियुक्त किया

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Court commissioner appointed

जल, रेत और पत्थरों का एक साथ अवैध दोहन हुआ तो पर्यावरण को होगा नुकसान

चेन्नई. अवैध रूप से जल निकासी मामले में चेन्नई, कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिला कलक्टरों से रिपोर्ट नहीं मिलने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को इसकी जांच के लिए एक अधिवक्ता को कोर्ट आयुक्त नियुक्त कर दिया। न्यायाधीश एस. मणिकुमार और न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद की न्यायिक बेंच ने अधिवक्ता एल. चंद्रकुमार को आयुक्त नियुक्त करते हुए आदेश दिया है कि वे जलस्रोतों का पता लगाएं और रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करें कि क्या वहां से पानी निकाल कर व्यावसायिक प्रयोग के लिए बेचा जा रहा है?

न्यायिक पीठ ने कहा कि ऐसी आशंका है कि इन जलस्रोतों से निकाला गया पानी अवैध रूप से बेचा जा रहा है। अगर जल, रेत और पत्थरों का एकसाथ अवैध दोहन शुरू कर दिया गया तो पर्यावरण को काफी नुकसान होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यही दोहराया है कि हमें अपने प्राकृतिक स्रोतों को अगली पीढ़ी के लिए बचाए रखना होगा फिर भी राज्य ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

इससे पहले महाधिवक्ता विजय नारायण ने कहा कि कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिले के गांवों में उन टैंकरों की सूची नामजद नहीं है जो उद्योगों, कारखानों व अन्य व्यावसायिक संस्थानों को पानी पहुंचाते हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में यह मामला एन. नागेश्वर राव और आर.के. इलयराजा द्वारा दायर याचिकाओं से लाया गया।