17 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दो तिहाई अनुपचारित सीवेज से जूझ रहा देश

- जल प्रदूषण का बड़ा घटक - स्थापित उपचार क्षमता का नहीं हो रहा पूर्ण उपयोग

2 min read
Google source verification
दो तिहाई अनुपचारित सीवेज से जूझ रहा देश

दो तिहाई अनुपचारित सीवेज से जूझ रहा देश

चेन्नई. देश के जलस्रोतों की बिगड़ी हालत को और माली बना रहे हैं अनुपचारित जल। देश में जितना प्रतिदिन सीवेज सृजित होता है उसके पूर्ण उपचार की व्यवस्था नहीं होना प्रदूषण का बड़ा कारण है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की मानें तो कुल सृजित सीवेज का केवल एक तिहाई हिस्सा ही उपचारित हो पा रहा है। बढ़ती आबादी और जल के उपभोग से भविष्य गर्त में जाता दिखाई दे रहा है।


सीपीसीबी की ताजा रिपोर्ट जो राज्य स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जारी की गई है वाकई चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में राज्यों में स्थापित क्षमता, उसके उपयोग और सीवेज के निस्तारण संबंधी आंकड़े हैं।


७२.३६ एमएलडी सीवेज
देश में रोजाना ७२ लाख ३६८ एमएलडी सीवेज पैदा होता है। जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की संख्या ३१ हजार ८४१ ही हैं। इनकी स्थापित क्षमता और उपयोग के विश्लेषण से पता चलता है कि इनसे रोजाना सिर्फ २० हजार २३५ एमएलडी अपशिष्ट जल का ही उपचार हो रहा है। चेन्नई मेट्रो वाटर एंड सीवेज बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार महानगर में बोर्ड द्वारा सिर्फ १२ प्लांट का संचालन हो रहा है और इनकी उपचारित क्षमता ७२७ एमएलडी है। जबकि महानगर में निकलने वाला अपशिष्ट जल इससे दोगुना ज्यादा है। तमिलनाडु में कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईपीटी) की संख्या भी महज ३७ है।


एसटीपी उपयोग का असमान वितरण
भारत में एसटीपी की क्षमता का उपयोग भी असमान है। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक ६० प्रतिशत क्षमता का ही उपयोग कर रहे हैं। जबकि ८६ प्रतिशत क्षमता के उपयोग करने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु और राजस्थान शामिल है। चंडीगढ़ ८८ फीसदी क्षमता का उपयोग कर अव्वल है तो ८०९ एमएलडी सीवेज उत्पादन करने वाले असम में तो एक भी एसटीपी काम नहीं कर रही है।


जल का पुन: उपयोग जरूरी
रिपोर्ट में उपचारित जल के पुन: उपयोग (रीयूज) पर बल दिया गया है। इस जल का उपयोग बागवानी, सिंचाई, वाहनों और ट्रेनों की धुलाई-सफाई, अग्निशमन, औद्योगिक अवशीतन, शौचालयों तथा बगीचों में किया जा सकता है।

राज्य उपचारित जल पुन: उपयोग
हरियाणा ८० प्रतिशत
पुदुचेरी ५५ प्रतिशत
दिल्ली ५० प्रतिशत
चंडीगढ़ ३५ प्रतिशत
तमिलनाडु २५ प्रतिशत
मध्यप्रदेश २० प्रतिशत
--------------------
सीवेज सिस्टम को अनिवार्य किया जाए

किसी भी तरह के निर्माण कार्य की अनुमति सीवेज सिस्टम की कीमत पर ही दी जाए। कानून में आवश्यक संशोधन जरूरी है। एसटीपी और पम्पिंग की ऑनलाइन निगरानी और उत्सृजित गाद को बायोगैस में बदलने जैसे उपायों पर कार्य होना चाहिए।

जयराम वेंकटेशन, संयोजक अरपोर इयक्कम