
एफएम रेडियो की तरफ बढ़ रहा क्रेज , मोबाइल सुविधा में रेडियो से मिला जीवनदान
चेन्नई. रेडियो से दूर हो रही आज की पीढ़ी एफएम रेडियो के जरिए फिर से जुडऩे लगी है। शहर में बढ़ती एफएम रेडियो चैनल्स की संख्या ने यह साबित कर दिया है कि नए कलेवर में रेडियो फिर से छा गया है। बहुत सारे लोग अपने कामकाज को लेकर अधिकांश समय ट्रेवलिंग में बिताते हैं और ऐसे में एफएम रेडियो पर सुरीले गाने उनके सफर को और आसान बना देते हैं। मोबाइल फोन में रेडियो सुनने की सुविधा आ जाने से इसे फिर से नया जीवन मिला है। कभी खेत-खलिहान में किसान-मजदूर से लेकर शिक्षित पीढ़ी तक जिंदगी का हिस्सा बन चुका रेडियो आज नए कलेवर में पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात ने भी लोगों को रेडियो की तरफ फिर से आकर्षित किया है। विविध भारती ने रेडियो को लोकप्रिय बनाने में अपनी असरदार भूमिका निभाई थी। हालांकि तमाम नए माध्यमों के बावजूद हम यह नहीं कह सकते कि रेडियो की दीवानगी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। हालांकि आज भी ग्राम्यांचल का बहुत बड़ा हिस्सा रेडियो सुनता है। एक जमाना वह भी था जब क्रिकेट की कंमेट्री को रेडियो पर सुनने के लिए लोग घंटों बिताया करते थे। रेडियो की वह खूबसूरत आवाज आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। कैब, ट्रक व बसों में भी आज भी हम रेडियो की आवाज अक्सर सुनते रहते हैं। इस तरह रेडियो से नाता आज भी बना हुआ है।
अब जमाना डिजिटल रेडियो का
रेडियो की खोज 1900 में एक इटेलियन वैज्ञानिक गुल्टेल्मो मार्कोनी ने की थी। साल दर साल इस में कई बदलाव हुए और दुनिया भर में खबरों का माध्यम बनकर उभरा। इन्टरनेट के इस युग में भी करीब 390 करोड़ लोगों के मनोरंजन का जरिया रेडियो ही है। आजादी के समय भारत में केवल 6 रेडियो स्टेशन थे लेकिन आज भारत में 250 से अधिक रेडियो स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। रेडियो स्टेशन विभिन्न तरंग आवृत्तियों पर अपने कार्यक्रम का प्रसारण करते हैं। जिसे श्रोता मीडियम वेव, शॉर्ट वेव के रूप में जानते हैं। सत्तर के दशक में टेलीविजन के आने के बाद भी रेडियो की महत्ता बरकरार रही। 1977 में चेन्नई में एफएम चैनल के आते ही ध्वनि की उच्च गुणवत्ता एवं कार्यक्रमों की विविधता के बल पर धूम मचा दी।
1993 में निजी एफएम चैनल आने से श्रोताओं के लिए अलग सुकून मिला। अब जमाना डिजिटल रेडियो का आ चुका है। हर हाथ में मोबाइल और इसके माध्यम से हर हाथ में रेडियो पहुंच चुका है। अब तो निजी एफएम रेडियो पर श्रोता समाचार भी सुन सकेंगे। केन्द्र ने हाल ही इसके लिए मंजूरी दी है। हालांकि एफएम स्टेशन को सरकार की तरफ से की गई शर्तों का पालन करना होगा। कई जेलों में भी कैदियों को रेडियो के माध्यम से गीत सुनाए जाते हैं। इनमें कैदी ही आरजे (रेडियो जॉकी) बनते हैं। कैदियों को प्रस्तुतिकरण की विद्या सिखाई जाती है। साथ ही जेल के अनुशासन से नियमों का पाठ भी पढ़ाया जाता है।
रसवंती एवं इन्द्रधनुष के प्रति आज भी आकर्षण
आकाशवाणी चेन्नई में उद्घोषक उदय मेघाणी ने बताया कि एफएम गोल्ड चैनल 100.1 पर हर रविवार, मंगलवार व गुरुवार को दोपहर 3.05 से 4 बजे तक हिंदी फिल्मी गीतों का रसवंती कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। रविवार को श्रोताओं से मिले खत के आधार पर उनकी पसंद के गीतों का फरमाइशी कार्यक्रम होता है। इसे आकाशवाणी चेन्नई से प्रसारित किया जाता है। इसी तरह चेन्नई-बी चैनल पर प्रतिदिन दोपहर 1.10 बजे से 1.30 बजे तक एक ही फिल्म के गीत सुनाए जाते हैं। प्रति रविवार शाम 6.15 से 7 बजे तक इन्द्रधनुष कार्यक्रम होता है। इसमें चेन्नई में रहने वाली प्रतिभाओं की कहानी, कविता पाठ आदि का प्रसारण किया जाता है। इसी कार्यक्रम के दौरान कभी रंगारंग कार्यक्रम होता है जिसमें चेन्नई के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों या संस्थानों के सदस्यों के प्रस्तुतिकरण का प्रसारण किया जाता है।
Published on:
19 Feb 2019 06:39 pm
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