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भाषाओं ने लोगों को जगाने एवं स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने की प्रेरणा दी, तीन दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक परिसंवाद

भाषाओं ने लोगों को जगाने एवं स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने की प्रेरणा दी- आजादी का अमृत महोत्सवः गांधी दर्शन और हिंदी आन्दोलन विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक परिसंवाद

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Dakshin Bharat Hindi Prachar Sabha Madras

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चेन्नई. अंग्रेजी केवल बोलने का माध्यम हैं, वह ज्ञान का पैमाना नहीं। हमें हिंदी व भारतीय भाषाओं का और अधिक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। आजादी दिलाने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विदेश एवं संसदीय मामलों के राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने यह बात कही। वे शनिवार को यहां टीनगर स्थित प्रचार सभा परिसर में आजादी का अमृत महोत्सवः गांधी दर्शन और हिंदी आन्दोलन विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक परिसंवाद के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअल संबोधन दे रहे थे। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय तथा दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के संयुक्त तत्ववाधान में आयोजित परिसंवाद में मुरलीधरन ने कहा कि महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। गांधीजी ने कहा था कि लोगों को जोड़ने के लिए भाषाएं अहम माध्यम होती है। गांधी ने क्षेत्रीय भाषाओं को भी महत्व दिया। भाषाओं ने देश भर के लोगों को जगाने एवं स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने की प्रेरणा दी।
हिंदी को प्रकृति की भाषा बनाएं
समारोह की विशिष्ट अतिथि प्रधान आयकर आयुक्त जहांजेब अख्तर ने कहा कि हम हिंदी को प्रकृति का भाषा बनाएं। हिंदी के साथ पर्यावरण व प्रकृति को जोड़ें। उन्होंने आह्वान किया कि प्रचार सभा को प्लास्टिक मुक्त संस्थान बनाने की दिशा में काम करें। समारोह के अध्यक्ष केन्द्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि हम अपनी शब्दावली को बढ़ाएं। जितने ज्यादा शब्द होंगे उतना बेहतर अनुवाद हो पाएगा। प्रक्रियाओं में बदलाव पर चिंतन की जरूरत है।
कई गणमान्य लोग थे मौजूद
प्रारम्भ में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास के प्रधान सचिव जी. सेल्वराजन ने स्वागत भाषण दिया। उद्घाटन सत्र का संचालन प्रोफेसर मंजूनाथ एन. अंबिग ने किया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पी. नजीम बेगम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रोफेसर सूर्यप्रसाद दीक्षित, वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर योगन्द्रनाथ शर्मा अरुण, प्रोफेसर सत्यकाम, प्रोफेसर दिलीपसिंह, प्रोफेसर राममोहन पाठक, प्रोफेसर एच.एस.बुधौलिया, प्रोफेसर जीतेन्दऱ कुमार श्रीवास्तव, पूर्व प्रोफेसर गोपाल शर्मा, प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा, प्रोफेसर तंकमणि अम्मा, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रचार सभा के पूर्व कोषाघ्यक्ष एस. पार्थसारथी, कुलसचिव प्रोफेसर प्रदीप के.शर्मा समेत कई शिक्षाविद मौजूद थे।