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आत्मकल्याण का आह्वान करती है ध्वजा

ध्वजारोहण के बाद बृहद शांति का मंगल पाठ सुनाया गया। ध्वजारोहण(dhwajarohan) का महत्व बताते हुए आचार्य ने कहा परमात्मा के मंदिर (temple) के शिखर पर चढ़ाई जाने वाली ध्वजा (dhwaja) के रंगों से हमें मंदिर में विराजित भगवान (bhagwan) का स्वरूप ज्ञात हो जाता है।

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आत्मकल्याण का आह्वान करती है ध्वजा

आत्मकल्याण का आह्वान करती है ध्वजा

चेन्नई. पूझल स्थित केशरवाड़ी तीर्थ में विराजित आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर के सान्निध्य में मंगलवार को आदिनाथ जिनालय पर ध्वजा चढ़ाई गई। जिनालय में सत्रहभेदी पूजा की नौवीं ध्वजा पढ़ाने के बाद लाभार्थी पानीदेवी मोहनलाल सोनवाडिया मूथा परिवार द्वारा जिनालय पर ध्वजा चढ़ाई गई। ध्वजारोहण के बाद बृहद शांति का मंगल पाठ सुनाया गया। ध्वजारोहण का महत्व बताते हुए आचार्य ने कहा परमात्मा के मंदिर के शिखर पर चढ़ाई जाने वाली ध्वजा के रंगों से हमें मंदिर में विराजित भगवान का स्वरूप ज्ञात हो जाता है। मंदिर में विराजित परमात्मा की प्रतिमा के दो स्वरूप होते हैं-जिस जिन प्रतिमा के साथ अष्ट प्रातिहार्य शासन के यक्ष-यक्षिणी आदि देवता के प्ररिवार सहित परिकर की स्थापना होती है। वह प्रतिमा अरिहंत स्वरूप होती है एवं परिकर रहित जिन प्रतिमा सिद्ध स्वरूप की होती है। जहां अरिहंत परमात्मा के स्वरूप में जिन प्रतिमा की प्रतिष्ठा की हो वहां ध्वजा में दो ओर लाल रंग एवं बीच में अरिहंत परमात्मा के वर्ण स्वरूप सफेद रंग का पट्टा होता है। जहां सिद्ध परमात्मा के स्वरूप में जिन प्रतिमा की प्रतिष्ठा की हो वहां ध्वजा में दो ओर सफेद रंग एवं बीच में सिद्ध परमात्मा के वर्ण स्वरूप लाल रंग का पट्टा होता है।
परमात्मा के मंदिर का शिखर सबसे ऊंचा होता है। वहां चढ़ाई जाने वाली ध्वजा जब लहराती है तो मानो वह हमें यह आह्वान कर रही हो कि हे भव्य जीवो, यदि आपको अपनी आत्मा का उद्धार करना है, चार गति स्वरूप संसार के परिभ्रमण से मुक्त होकर शाश्वत सुख के स्थान स्वरूप मोक्ष पद को प्राप्त करना हो तो मंदिर में विराजित वीतराग परमात्मा की शरण स्वीकार करो।