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आईएएस बनने की जिद के चलते खोल ली दुकान, अब बचत के पैसों से करेंगे तैयारी

आईएएस बनने की जिद के चलते खोल ली दुकान, अब बचत के पैसों से करेंगे तैयारी- दो दोस्तों का जुनून

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चेन्नई. वी किशोर और एम धनकोडी, जिनकी उम्र करीब 19 साल है और जो 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का है। इसी तड़प ने उन्हें कुछ नया करने की ओर प्रेरित किया। आर्थिक हालात अच्छे न होने के चलते दोनों ने मिलकर सड़क के किनारे खाने-पीने की एक दुकान खोली।
गोरीमेडु के पास एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल का छात्र किशोर तिरुवेनी गार्डन में रहता है। उसके पिता लॉरी चलाते हैं। उसके दो भाई-बहन स्कूल जाते हैं। 14 साल की उम्र से किशोर ने सप्ताहांत में निर्माण स्थलों पर काम करना शुरू कर दिया था।
धनकोडी सेलम शहर के एक अन्य सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़ता है और पनमारथुपट्टी में रहता है। उनका परिवार आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से है और धनकोड़ी के जन्म के बाद वे सेलम चले गए। कक्षा 1 में पढ़ते समय उसके पिता की मौत हो गई। बाद में एक अनाथालय में रहे। उसने गोरिमेदु के एक सहायता प्राप्त स्कूल में दाखिला लिया और यहीं पर उनकी पहली मुलाकात किशोर से हुई। 10वीं कक्षा तक उन्होंने एक साथ पढ़ाई की और फिर धनकोड़ी दूसरे स्कूल में चला गया।
व्यंजन बनाने सीख लिए
किशोर ने बताया, घर वापस आने पर हमें एक साथ ला दिया और हम तब से अच्छे दोस्त हैं। महामारी की शुरुआत के साथ मुझे निर्माण स्थलों पर कोई काम नहीं मिला। इसलिए मैं अपने इलाके में एक थट्टू वडाई की दुकान पर काम करने लगा। यहां सीखा कि विभिन्न प्रकार के व्यंजन कैसे तैयार किए जाते हैं। बाद में हम दोनों ने दुकान खोल ली। हम दोनों के पास 10 हजार रुपए थे, जिसे हमने कंस्ट्रक्शन वर्क से बचाए थे। हमारे दोस्तों ने भी कुछ पैसे दिए और हम 40,000 रुपए जमा करने में कामयाब हो गए। इस तरह नवंबर के आखिरी सप्ताह में 'नम्मा कड़ाई' नाम से दुकान खोल ली।
कमाई को दोगुना करने के लिए एक और दुकान खोलेंगे
हम दोनों अब रोजाना लगभग 500 रुपए कमाते हैं। हमारा उद्देश्य पर्याप्त पैसा कमाना और फिर कॉलेज की पढ़ाई के लिए चेन्नई या कोयंबत्तूर जाना है। आने वाले समय में हम सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर देंगे। हम अपनी कमाई को दोगुना करने के लिए जल्द ही एक और सड़क किनारे दुकान भी शुरू कर सकते हैं। जब हम उच्च अध्ययन के लिए दूसरे शहर में जाएंगे तो हम वहां अपना पुश कार्ट ले जाएंगे और व्यवसाय फिर से शुरू करेंगे।
हम रोजाना सीधे किसानों से सब्जियां खरीद रहे
धनकोडी ने एसएसएलसी में 412 अंक हासिल किए।पुलिस ने शुरुआत में 'नम्मा कड़ाई' को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि युवकों के सपनों का पता चलने पर अधिकारियों ने दुकान की अनुमति दे दी। उन्होंने सिर्फ चेतावनी दी कि वाहन यातायात के लिए कोई परेशानी न हो। हम अपनी दुकान में प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग नहीं करते हैं और चूंकि हमारे पास घर में रेफ्रिजरेटर नहीं है, इसलिए हम रोजाना सीधे किसानों या बाजार से सब्जियां खरीदते हैं।