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इलेक्शन किंग के. पद्मराजन ने 227वीं बार दाखिल किया चुनावी पर्चा, आज तक जीत हासिल कर पाए

रिकॉर्ड बुक में का नाम सबसे ज्यादा बार चुनाव हारने की वजह से शुमार किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह हार-जीत की परवाह किए बिना हर चुनाव में पर्चा दाखिल करते हैं।

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इलेक्शन किंग के. पद्मराजन ने 227वीं बार दाखिल किया चुनावी पर्चा, आज तक जीत हासिल कर पाए

इलेक्शन किंग के. पद्मराजन ने 227वीं बार दाखिल किया चुनावी पर्चा, आज तक जीत हासिल कर पाए

मदुरै.

अपने उपनाम 'इलेक्शन किंग' की वजह से चर्चा में रहने वाले के. पद्मराजन चुनाव में एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने जा रहे है। 62 साल के पद्मराजन 227वीं बार चुनाव में पर्चा दाखिल कर रहे हैं। पद्मराजन ने सबसे ज्यादा चुनाव लड़े हैं। रिकॉर्ड बुक में का नाम सबसे ज्यादा बार चुनाव हारने की वजह से शुमार किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह हार-जीत की परवाह किए बिना हर चुनाव में पर्चा दाखिल करते हैं।

निकाय चुनाव में आजमा रहे किस्मत
पद्मराजन इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। उन्होंने वेराक्कलपुदूर (वार्ड 2) से स्थानीय निकाय चुनाव लडऩे के लिए अपना पर्चा दाखिल किया है। 19 फरवरी को यहां चुनाव होंगे। बताया जाता है कि पद्मराजन कोई भी चुनाव जीतने के इरादे से नहीं लड़ते हैं और ना ही आज तक किसी भी चुनाव में जीत हासिल कर पाए हैं। दरअसल, पद्मराजन यह साबित करना चाहते हैं कि एक आम आदमी भी चुनाव में खड़ा हो सकता है।

सेलम निवासी है पद्मराजन
पद्मराजन राज्य के सेलम जिले के निवासी हैं। उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार कई चुनावों में नामांकन दाखिल किया है। वह 1988 से ही ऐसा कर रहे हैं। पद्मराजन सेलम के मेत्तूर में टायर का बिजनस करते हैं। उन्होंने सबसे पहले 1986 में मेत्तूर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया था। तब से लेकर अब तक वह राज्य में कई प्रमुख उम्मीदवारों के खिलाफ नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

इनके खिलाफ लड़ा चुनाव
के पद्मराजन टायर के बिजनेस में हैं। साल 1986 में के पद्मराजन ने मित्तूर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इसके बाद से उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, पी वी नरसिम्हा राव के खिलाफ भी चुनाव लड़ा। इसके अलावा के पद्मराजन ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा पाटिल, के आर नारायणन और ए पी जे अब्दुल कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था।

वल्र्ड रेकॉर्ड में नाम दर्ज कराना मकसद
चुनाव लडऩे के बारे में पद्मराजन ने कहा कि कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकता क्योंकि चुनाव में पैसा अहम भूमिका अदा करता है। हालांकि मैं पर्चा दाखिल करता रहता हूं ताकि ऐसा कर मैं गिनेस बुक ऑफ वल्र्ड रेकॉड्र्स में अपना नाम दर्ज करवा सकूं। मैं चुनाव के लिए प्रचार नहीं करूंगा। नॉमिनेशन दाखिल करने के बाद मेरा काम खत्म हो जाता है।