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सस्पेंशन अवधि भुगतान बढ़ाने का दावा नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच पुलिस ने 2018 में ग्रुप 1 परीक्षा में कथित रूप से अनियमितता करने के आरोप में एक भर्ती अधिकारी काशीराम कुमार को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ मामला विचाराधीन है।

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सस्पेंशन अवधि भुगतान बढ़ाने का दावा नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

सस्पेंशन अवधि भुगतान बढ़ाने का दावा नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय का कहना है कि निलंबित कर्मचारी निलबंन की अवधि से जुड़े वेतन को बढ़ाकर देने का दावा नहीं कर सकता। यह उसका अधिकार नहीं है।

चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच पुलिस ने 2018 में ग्रुप 1 परीक्षा में कथित रूप से अनियमितता करने के आरोप में एक भर्ती अधिकारी काशीराम कुमार को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ मामला विचाराधीन है।

मई 2018 में इस केस के चलते काशीराम कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें उनके वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान किया गया।

इस स्थिति में काशीराम कुमार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर निलंबन आदेश को निरस्त करने तथा इस अवधि में देय भुगतान को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की मांग की।

उसका तर्क था कि छह महीने से ज्यादा बीत चुके हैं और उसके खिलाफ चालान दायर नहीं किया गया है। कार्रवाई में तेजी लाएं -इसके अलावा, न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि काशीराम कुमार के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तेजी से समाप्त की जानी चाहिए और याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने का निर्देश देते हुए मामले को स्थगित कर दिया।

निलंबन आदेश की हर तीन महीने में समीक्षा होगी
लोक सेवा आयोग की ओर से याचिकाकर्ता को बताया गया कि याचिकाकर्ता के निलंबन आदेश की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी और उसे बहाल नहीं किया जाएगा।

मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश वैद्यनाथन ने फैसला सुनाया कि निलंबन के छह महीने बीत जाने की वजह से याची इस अवधि में किए जाने वाले भुगतान को बढ़ाकर देने का दावा नहीं कर सकता। यह उसका अधिकार नहीं है। इस पर संबंधित अधिकारी ही फैसला कर सकते हैं।