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चेन्नई. जैविक खेती के महत्व को स्वीकार करते हुए, राज्य सरकार ने अगस्त में कृषि विभाग में एक अलग विंग बनाने की घोषणा की थी। किसानों का आरोप है कि इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
तमिलनाडु केला उत्पादक संघ के राज्य महासचिव जी अजितन ने कहा, जैविक खेती खेती की एक प्रणाली है जिसमें बुवाई से पहले की जरुरतों को ध्यान रखा जाता है। उत्तर-पूर्वी मानसून के चलते कई जिलों में प्रचुर मात्रा में बारिश हुई है। राज्य सरकार किसानों को जैविक खेती के लिए मिट्टी तैयार करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं, लेकिन अभी तक ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
योजना शुरू करने का सही समय
अजीतन ने कहा कि सरकार को जैविक खेती के लिए बुवाई पूर्व नामांकन पर ध्यान देना चाहिए, इसके माध्यम से किसान जैविक प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने बुवाई से पहले की तैयारियों के लिए सब्सिडी भी मांगी। उन्होंने कहा, मौजूदा ऑर्गेनिक फॉर्मर्स को प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है और यह योजना शुरू करने का सही समय है।
उन्होंने कहा, सबसे पहले, राज्य सरकार जैविक खेती पर जागरूकता पैदा करने में विफल रही। हालांकि जैविक खेती के लिए एक अलग विंग शुरू करने की योजना है, सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। क्योंकि कृषि, बागवानी और बीज प्रमाणन विंग में कई पद खाली हैं। इन्हें भरे बिना सरकार एक अलग विंग कैसे बना सकती है?
अलग विंग का मामला ठंडे बस्ते में
सरकार ने आधिकारिक सुविधाओं के लिए कोयंबत्तूर से चेन्नई में बीज और जैविक प्रमाणीकरण कार्यालय स्थानांतरित करने का फैसला किया था। किसान ने कहा कि अभी भी अलग विंग का मामला ठंडे बस्ते में है। इस योजना के तहत जैविक आदानों की खरीद, कीटनाशक, अवशेष विश्लेषण और मूल्य संवर्धन इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता देने के सरकार के आश्वासन पर भी कोई कदम नहीं उठाया गया है।
कृषि विभाग के सूत्रों ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि सरकार जैविक खेती विकास कार्यक्रम के लिए कब आदेश जारी करेगी। बीज प्रमाणन के सहायक निदेशक रामचंद्रन ने कहा कि प्रक्रिया प्रगति पर है।
Published on:
15 Nov 2021 12:20 am
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