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सत्ताधारी दल को सताने लगा हार का भय

अब होगा स्थानीय निकाय में मेयर का अप्रत्यक्ष चुनाव

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Purushottam Reddy

Jun 23, 2016

political leaders

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चेन्नई.
अब फिर से पार्षद ही मेयर का चुनाव करेंगे। राज्य सरकार ने इस आशय का विधेयक विधानसभा में पारित किया। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सरकार इसी साल के अंत में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में हार के डर से यह विधेयक लेकर आई है। हाल ही हुए विधानसभा चुनाव में चेन्नई महानगर की 16 सीटों में से 10 पर डीएमके ने कब्जा जमाया था।

इसका एक कारण पिछले वर्ष दिसम्बर में आई बाढ़ के दौरान एआईएडीएमके सरकार की बाढ़ राहत कार्य में चुस्ती-फुर्ती कम दिखना भी था। इसका जवाब मतदाताओं ने डीएमके उम्मीदवारों के प्रति भरोसा करके दिया।
फिर पुरानी व्यवस्था लागू
इसी तरह प्रदेश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में डीएमके के उम्मीदवार जीते थे। पिछले टर्म में मेयर सीधे चुनकर आए थे। अब फिर से पुरानी व्यवस्था लागू की गई है जिसमें पार्षद ही मेयर का चुनाव करेंगे।
राज्य सरकार ने इस आशय का विधेयक विधासनभा में पारित कर दिया। हालांकि मौजूदा समय में प्रदेश में सभी 12 निगमों में सत्ताधारी दल एआईएडीएमके के ही मेयर है।

1996 में छह से 12 नगर निगम किए गए तथा चुनाव के ढंग में भी बदवाल किया गया। 1996 में छह निगमों चेन्नई, कोयम्बत्तूर, मदुरै, तिरुचि, तिरुनेलवेली एवं सेलम में मेयर के सीधे चुनाव हुए। लेकिन 2006 में डीएमके सरकार ने कानून में बदलाव लाते हुए मेयर का अप्रत्यक्ष चुनाव करवाने का बिल पास किया। 2001 में मेयर के लिए हुए सीधे चुनाव में डीएमके के एम.के. स्टालिन मेयर चुने गए लेकिन उनके दल के पर्याप्त काउंसलर चुनकर नहीं आ सके।

ऐसे में 2006 में डीएमके ने सत्ता में आने पर मेयर के चुनाव में परिवर्तन करते हुए फिर से अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली लागू की।

दस वर्ष में छह नए नगर निगम बने
पिछले 10 वर्ष में डीएमके एवं एआईएडीएमके के शासन के दौरान वेलूर, तुत्तुकुड़ी, तिरुपुर, ईरोड, दिण्डीगुल, तंजावुर को निगम में तब्दील किया गया। 2011 में एआईएडीएमके ने मेयर का सीधा चुनाव कराने का विधेयक पारित किया। स्थानीय निकाय में महिलाओं के लिए आरक्षण 33 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा चुका है।

एक पूर्व आईएएस अधिकारी के अनुसार मेयर का चुनाव सीधे कराया जाना चाहिए। शहरी निकायों में ग्रामीण निकायों की तुलना में जरूरतें अलग होती हैं। हालांकि एक अन्य अधिकारी की राय अलग है, वे कहते हैं मेयर का चुनाव पार्षदों के जरिए ही होना चाहिए। यदि मेयर का सीधा चुनाव होता है और मेयर के दल के पार्षद बहुमत में नहीं हों तो उन्हें कार्य करने में कई तरह की कठिनाइयां आती हैं।

अप्रत्यक्ष रूप से यदि चुनाव होता है और यदि मेयर किन्ही कारणों से त्यागपत्र भी दे देता है तो मेयर के लिए अलग से चुनाव की जरूरत नहीं होती और पार्षद नए मेयर का चुनाव कर सकते हैं।