
कन्याकुमारी.
जिले के मछुआरा संगठनों ने आगामी विधानसभा चुनावों में किलियोर और कोलाचेल सीटों पर मछुआरा समुदाय से उम्मीदवार उतारने की मांग की है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में बड़ी आबादी होने के बावजूद समुदाय को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। एआइएडीएमके ने किलियोर सीट तमिल मनीला कांग्रेस और कोलाचेल सीट भाजपा को दी है, जबकि डीएमके गठबंधन ने अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। वर्तमान में कांग्रेस की विधायक थाराहाई कुटबर्ट ही जिले में मछुआरा समुदाय से चुनी गईं प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने 2024 उपचुनाव में विलवांकोडे से जीत दर्ज की थी। इससे पहले 1996 में डीएमके के इरा बर्नार्ड कोलाचेल से विजयी हुए थे। जिला मशीनीकृत नौकाएं संघ के सचिव कैप्टन जॉनसन ने कहा कि 1957 में कांग्रेस की अन्नाई लौर्डम्मल साइमन कोलाचेल से चुनी गईं और वे तमिलनाडु की पहली महिला मंत्री बनीं लेकिन बाद के वर्षों में राज्य और राष्ट्रीय दलों ने मछुआरा समुदाय को व्यवस्थित रूप से दरकिनार कर दिया।
कुल मछुआरा जनसंख्या का 20 प्रतिशत हिस्सा
साउथ एशियन फिशरमेन फ्रेटरनिटी के महासचिव फादर चर्चिल ने बताया कि जिले में 48 तटीय गांव और 62 आंतरिक मछुआरा बस्तियां हैं जो राज्य के कुल मछुआरा जनसंख्या का 20 प्रतिशत हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इन समुदायों के वोट किलियोर, कोलाचेल और कन्याकुमारी सीटों पर जीत-हार तय करते हैं।
लगभग 70,000 मतदाता मछुआरा समुदाय से
आईएनएफआईडीईटी के अध्यक्ष जस्टिन एंटनी ने कहा कि किलियोर में लगभग 70,000 मतदाता मछुआरा समुदाय से हैं, लेकिन मुख्यधारा की राजनीति अब भी उनके लिए सपना बनी हुई है। केकेएम संगठन के सचिव मिल्टन कार्मेल ने याद दिलाया कि 2011 में जयललिता ने कोलाचेल से मछुआरा समुदाय के उम्मीदवार लॉरेन्स को उतारा था लेकिन वे दूसरे स्थान पर रहे। उसके बाद से किसी बड़े दल ने इस समुदाय से उम्मीदवार नहीं उतारा। अब मछुआरा संगठन मांग कर रहे हैं कि डीएमके और कांग्रेस विशेषकर किलियोर सीट पर समुदाय से उम्मीदवार उतारें ताकि उनकी समस्याओं और मांगों को विधानसभा में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
Published on:
26 Mar 2026 08:51 pm
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