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आंसुओं के सागर में पत्नी व पूरा कारकुड़ी गांव

पुलवामा आतंकी हमलाछुट्टियां बिताकर ९ फरवरी को ही लौटा था शिवचंद्रन

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He left hundreds in tears, Pulwama CRPF attack

आंसुओं के सागर में पत्नी व पूरा कारकुड़ी गांव

चेन्नई. सीआरपीएफ के काफिले पर गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में तमिलनाडु के दो सपूत शिवचंद्रन और सुब्रमण्यम भी शहीद हो गए।


अरियलूर जिले के कारकुड़ी गांव के चिन्नयन के परिवार तो आसमान ही टूट पड़ा जब उनको खबर मिली कि उनका बेटा शिवचंद्रन आतंकी हमले में शहीद हो गया है। इस खबर के बाद पूरा गांव शोक संतप्त है।


शिवचंद्रन अपने परिवार का इकलौता पुत्र रह गया था जिसके भरोसे अन्य सदस्यों की गुजर-बसर चल रही थी। वे २०१० में सीआरपीएफ में शामिल हुए। २०१४ में उनका विवाह गांधीमती से हुआ। इनके दो साल का बेटा है। सीआरपीएफ में होने की वजह से शिवचंद्रन का समय परिवार के साथ कम और देश की रखवाली में ज्यादा कटता था।


शिवचंद्रन गत जनवरी महीने में वार्षिक अवकाश पर गांव आए थे। वे अयप्पा भक्त थे और उन्होंने वार्षिक पूजा के तहत माला धारण करने के बाद शबरीमला दर्शन करने भी गए थे। बचा समय परिवार के साथ हंसी-खुशी काटने के बाद वे ९ फरवरी को देश सेवा के लिए लौट गए। उनको शायद यह पता नहीं था कि वह उनका परिवार के साथ आखिरी दिन था।


घर नहीं बचा पाया बेटा...
शिवचंद्रन के पिता ने बोझिल मन से कहा वित्तीय मदद मिल भी जाएगी तो उसका हम क्या करेंगे? मेरा बेटा देश को बचाने गया था लेकिन परिवार को नहीं बचा पाया। बहू नर्सिंग पास है उसे सरकारी नौकरी मिल जाए तो परिवार चलाने में मदद मिलेगी।