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मोटी तनख्वाह मिल रही, काम तो कीजिए!

मद्रास उच्च न्यायालय को कहना पड़ा है कि तनख्वाह लेने वाले कर्मचारी और अफसर काम नहीं करते हैं

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मोटी तनख्वाह मिल रही, काम तो कीजिए!

मोटी तनख्वाह मिल रही, काम तो कीजिए!

सरकारी महकमों में लालफीताशाही और भ्रष्टाचार आम बात है, लेकिन इसके बाद भी काम तो होता है। हालांकि पिछले एक साल के भीतर ऐसे कई मिसालें मिलीं हैं, जहां मद्रास उच्च न्यायालय को कहना पड़ा है कि तनख्वाह लेने वाले कर्मचारी और अफसर काम नहीं करते हैं। ताजा टिप्पणी हाईकोर्ट ने हिन्दू धार्मिक कार्य व बंदोबस्ती विभाग के अफसरों पर की है। यह मामला विभाग को बकाया किराये की वसूली से जुड़ा था, जो पूम्पहार शिपिंग कॉर्पोरेशन से वसूला जाना था। देखा जाए तो दोनों ही महकमे सरकार का अंग हैं, लेकिन इनका आय-व्यय का लेखा-जोखा अलग-अलग होता है। नियम-कायदे और परिचालन के तरीके अलग हैं। हिन्दू धार्मिक कार्य विभाग करोड़ों लोगों की आस्था वाले मंदिरों का संचालन और अनुरक्षण करता है। ऐसे में उससे अपेक्षा रहती है कि वह अपने आय के जरिए को पुख्ता रखेगा, उनको बढ़ाएगा तथा प्राप्त राजस्व का उपयोग भक्तों व श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में करेगा।

मंदिरों से जुड़ा मसला है तो यह भी बता दें कि राज्य के सैकड़ों मंदिरों की जमीनों पर अवैध कब्जा है, इनसे जुड़े मामले अदालतों में विचाराधीन हैं, तो कई जगहों पर आदेश होने के बाद भी अतिक्रमण हटाने के ठोस उपाय नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जहां विभाग को किराया प्राप्त करने का पूरा हक है, वहां उसका शिथिल और निष्क्रिय रहना कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है? लिहाजा एक आम व्यक्ति ने मद्रास हाईकोर्ट की शरण ली और अदालत से निर्देश जारी कराए। यह बात और है कि उसकी भी तामील नहीं हुई तथा उसी फरियादी को फिर से अदालत की अवमानना का मुकदमा दायर करना पड़ा। न्यायिक अवमानना के अधिकांश मामलों की पृष्ठभूमि में अतिक्रमण के मसले होते हैं, जहां प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह लापरवाही बरतते नजर आते हैं। उनकी इस निष्क्रियता पर अदालत का यह कहना ठीक ही प्रतीत होता है कि वे सरकार से मिल रही मोटी तनख्वाह के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। यह न्यायिक टिप्पणी समूचे कर्मचारी और अधिकारी वर्ग को चेताने के लिए काफी होनी चाहिए कि अगर वे उनको मिली जिम्मेदारी का उचित निर्वाह करें तो व्यवस्था को सुचारू किया जा सकता है।