18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हिंदी भाषा राष्ट्रीय चेतना की संवाहक

राजभाषा हिंदी (Hindi) के प्रयोग व व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए इसे सरल (Easy) बनाना जरूरी है। निरंतर प्रयोग व अभ्यास से ही राजभाषा को सही मायने में अपना सकेंगे।

less than 1 minute read
Google source verification
Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha,Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha

Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha,Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha,Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha,Hindi: Tamilnadu, Chennai, Hindi, Language, Rajbhasha

चेन्नई. भाषा से ही ज्ञान, विज्ञान, सभ्यता एवं संस्कृति के बारे में पता चलता है इसीलिए सामाजिक विकास में भाषा की अधिक अहमियत है। वूमेन्स किश्चियन कॉलेज की हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनीता जाजोदिया ने यह बात कही। वे प्रादेशिक मौसम विज्ञान केन्द्र में हिंदी पखवाड़े के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं। उन्होंने कहा हिंदी भाषा राष्ट्रीय चेतना की संवाहक है क्योंकि इस आदान-प्रदान में हम अनायास ही इससे जुड़ते जाते हैं।

सरल बनाना जरूरी

पांच से अधिक भाषाएं सीखने की मानव मस्तिष्क की क्षमता होती है लेकिन महाकवि भारती 20 से अधिक भारतीय भाषाओं और तीन विधेशी भाषाओं के जानकार थे। राजभाषा हिंदी के प्रयोग व व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए इसे सरल बनाना जरूरी है। निरंतर प्रयोग व अभ्यास से ही राजभाषा को सही मायने में अपना सकेंगे।
पांच दशक में बढ़ी अंग्रेजी
जाजोदिया ने कहा पिछले पांच दशक में अंग्रेजी पनपी है जिसका कारण है हमने उसे अपनाने का अभ्यास किया। करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान...तो क्यों न हम हिंदी दिवस के मौके से शुभ संकल्प लेकर इसकी शुरुआत करें।

हिंदी सेवा के लिए तारीफ

प्रादेशिक मौसम विज्ञान केन्द्र में हिंदी कार्य व गतिविधियों की सराहना करते हुए केन्द्र निदेशक डॉ. पूवी अरसन, डॉ. अमुदा, डॉ. कु.वै.बालसुब्रमण्यन समेत अन्य की हिंदी सेवा के लिए तारीफ की।

हिंदी की उपयोगिता
इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एन. पुवियारसन ने हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। हिंदी अधिकारी डॉ. के.वी बालसुब्रमण्यन ने स्वागत किया। इस मौकेे पर सामान्य ज्ञान एवं गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई। डा. बी. अमुदा एवं डा. सुब्रमण्यन ने इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका अदा की।