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एक सिमुलेटर और ऐप्स के माध्यम से 2,000 स्कूल बस चालकों का होगा प्रशिक्षण

-सडक़ों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एडवांस्ड ड्राइवर एसिस्ट सिस्टम के नए विचारों की होगी पहचान-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी ने एसएनएस फाउंडेशन से की भागीदारी

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एक सिमुलेटर और ऐप्स के माध्यम से 2,000 स्कूल बस चालकों का होगा प्रशिक्षण

एक सिमुलेटर और ऐप्स के माध्यम से 2,000 स्कूल बस चालकों का होगा प्रशिक्षण



चेन्नई.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी ने एसएनएस फाउंडेशन से एक अहम भागीदारी की है जिसका मकसद सडक़ सुरक्षा में मानव व्यवहार के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान और विकास करना और संबंधित भागीदारों की क्षमता और सफलता बढ़ाना है।
सीओईआरएस, आईआईटी मद्रास और एसएनएस फाउंडेशन के बीच इस सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत निकट भविष्य में लगभग 2000 चालकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
इस सहयोग के आरंभ पर एस सारथी, ग्रुप प्रेसिडेंट, आनंद ग्रुप, ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, मेसर्स एचएलएमएआईएल ने कहा हम सेफ्टी सिस्टम में ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माता होने के नाते सडक़ दुर्घटनाओं और उनमें मृत्यु की संख्या देख कर बहुत चिंतित हैं। हम भारत में सडक़ सुरक्षा के भागीदारों की क्षमता और सफलता बढ़ाने के प्रत्यक्ष प्रयास करेंगे।
आईआईटी मद्रास के डीन (इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एवं स्पॉन्सर्ड रिसर्च) प्रोफेसर मनु संथानम ने ऐसे सहयोगों को अहम बताते हुए कहा अच्छी सडक़ों के बावजूद काफी सडक़ दुर्घटनाएं हो रही हैं। सिर्फ तमिलनाडु नहीं बल्कि पूरे भारत में ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई हैं जिन्हें टाला जा सकता था परंतु इनके चलते लोगों की जानें गई हैं। इसलिए वाहन चालकों के तौर-तरीकों में गंभीर सुधार अपेक्षित है और साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने पर भी जोर देना जरूरी है।
उन्होंने कहा हमें जन-जन को जागरूक करना होगा कि सडक़ संसाधनों का कैसे उपयोग करेंं। मुझे विश्वास है कि इस सहयोग से आईआईटी मद्रास के शोध में वाहन चालकों के तौर-तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और सुरक्षित वाहन परिचालन के लिए क्या आवश्यक है यह समझने में लोगों की मदद की जाएगी। यह सडक़ों को दुर्घटना शून्य बनाने के रास्ते में सभी चुनौतियों को सामने रखने का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी के लिए बड़ा अवसर है।
इस पहल के समन्वयक प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यन, प्रमुख, सीओईआरएस और प्रोफेसर, आरबीजी लैब्स, इंजीनियरिंग डिजाइन विभाग, आइआइटी मद्रास ने इस सहयोग के बारे में बताया सडक़ सुरक्षा के प्रमुख घटक हैं वाहन, बुनियादी ढांचा और मनुष्य का दोनों से परस्पर संपर्क। वाहन और सडक़ों की इंजीनियरिंग पर महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास हुआ है लेकिन मनुष्य के व्यवहार संबंधी पहलुओं में सुधार करने का यह बड़ा अवसर सामने आया है। हम इस सहयोग से वाहन चालकों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं जो इसके बाद उनके साथ स्कूल जाते अपरिपक्व उम्र के बच्चों को सडक़ पर चलने का प्रशिक्षण देंगे।


ये होंगे फायदे
1.सिम्युलेटर आधारित करिकुलम तैयार कर सडक़ सुरक्षा नियमों के बारे में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देना, चेन्नई और आसपास के स्कूल और कॉलेज बसों और वैन चालकों को सही तौर-तरीकों और व्यवहार का प्रशिक्षण देना ताकि वे उनके साथ सफर करने वाले अपरिपक्व उम्र के बच्चों में सडक़ सुरक्षा के नियमों का पालन करने की आदत डालें।
2.सीओईआरएस इकोसिस्टम में सडक़ सुरक्षा के नए विचारों को बढ़ावा देते हुए उन्हें प्रोडक्ट का रूप देना। इसके लिए हैकथॉन आयोजित कर संभावनाओं से भरपूर नए विचारों की पहचान करना और उन्हें विकसित कर प्रोटोटाइप स्टेज पर ले जाना।