चेन्नई. तमिलनाडु के दूर-दराज और देहात क्षेत्र के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर विज्ञान की तालीम देने के लिए ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र खोले जाएंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास प्रवर्तक प्रौद्योगिकी फाउंडेशन और आशा फॉर एजुकेशन मिलकर ये केंद्र शुरू करेंगे।
इस योजना की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को तिरुवल्लूर जिले के गंगमाछत्रम और सितंजेरी गांवों में हुई जहां २ ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र खोले गए। गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल, गंगमाछत्रम की दो छात्राएं जिनको इस केंद्र से कम्प्यूटर विज्ञान का प्रशिक्षण मिलेगा ने अपने अनुभव बांटते हुए खुशी जाहिर की।
केंद्र का कार्य
ये केंद्र प्रौद्योगिकी ज्ञान का प्रचार करने के अलावा तमिलनाडु के ग्रामीण विद्यार्थियों को इसके लाभ बताएंगे। इस केंद्र के प्रशिक्षक ९ से १२ के विद्यार्थियों को सिखाएंगे। यह केंद्र विद्यार्थियों में नई तकनीक के उपयोग का साहस भरेगा। नई प्रौद्योगिकियों के अनुभव की उनको तालीम दी जाएगी। विद्यार्थियों की कम्प्यूटेशनल और डिजाइन सोच को विकसित किया जाएगा। आईआईटी मद्रास प्रवर्तक प्रौद्योगिकी फाउंडेशन ने इस योजना के लिए वित्तीय सहयोग भी दिया है।
हमारी यात्रा शुरू
देश के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उद्देश्यपरक और गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए हम कटिबद्ध हैं। इन दो केंद्रों की शुरुआत के साथ हमारी यह यात्रा आरंभ हुई है।
प्रो. वी. कामकोटि, निदेशक आईआईटी मद्रास
छात्रों के लिए लाभकारी
हमारा विद्यालय ग्रामीण इलाके में है जो मुख्यत: कमजोर तबके के विद्यार्थियों को पढ़ाता है। कम्प्यूटर सिखाने का यह प्रयास उनके लिए काफी लाभदायक होगा।
टी. गुणशेखर हेडमास्टर, कनकाछत्रम स्कूल

सरकारी स्कूलों के पास ही खुलेंगे केंद्र
आशा फॉर एजुकेशन के राजारामन कृष्णन ने प्रशिक्षण संबंधी पहल पर कहा कि जिन उपकरणों के माध्यम से सिखाया जाएगा वे बेहद आसान हैं। उनके उपयोग से मिडिल स्कूल के बच्चे कुछ ही दिनों में पारंगत हो जाएंगे। हम प्रशिक्षण में आईआईटी के अनुभव और विशिष्टता का भी उपयोग करेंगे। हमारा लक्ष्य सरकारी स्कूलों के पास ही इन केंद्रों को खोलने का है। ताकि स्कूल समाप्ति के बाद शाम के वक्त विद्यार्थी हमारे केंद्रों पर आकर प्रशिक्षण ले सकें।