
चेन्नई. विश्व में भारत केला उत्पादन में पहले नंबर पर होने के बावजूद निर्यात के मामले में बहुत पीछे हैं। दुनिया में हमारे यहां का केला सबसे ज्यादा मीठा है लेकिन रंग व साइज में हम पिछड़ रहे हैं। फिलीपिंस, इक्वाडोर व वियतमान हमसे निर्यात में बहुत आगे है। भारत का निर्यात में चौथा स्थान है। गौर करने वाली बात यह है कि हम कुल उत्पादन का केवल पांच फीसदी ही निर्यात कर पा रहे हैं जबकि 95 फीसदी तो घरेलु खपत हो जाती है।
इसलिए केला निर्यात में हम पीछे
हमारे यहां कंटेनर से केला जाता है जबकि अधिक निर्यात करने वाले देश सीधे शिप से भरते हैं। यूरोपियन देशों में दाम अच्छा मिलता है। सबसे बड़ा मार्केट खाडी देशों का है। दुनिया में जितना उत्पादन हो रहा है उसकी 40 प्रतिशत खपत केवल भारत में ही है। हमारे यहां लागत कम है, खर्च कम है। हमारे यहां एक किलो केला पकाने मे 3.20 रुपए व फिलीपींस में 19.12 रुपए लग रहे हंै। ऐसे में हम सबसे सस्ते है। एक्सपोर्ट की संभावना हमारी होनी चाहिए। फिर भी हम निर्यात में पीछे है। क्योंकि हम गुणवत्ता में बहुत पीछे हैं। हमारा कंटेनर 12 लाख का बिकता है। फिलीपिंस का 22 लाख में जाता है। हमारे केले में दाग रहता है। उनके केले में रत्ती भर भी दाग नहीं मिलता।
चीन, फिलीपिंस व इक्वाडोर भी बड़े उत्पादक
भारत के बाद चीन, फिलीपिंस व इक्वाडोर अगले सबसे बड़े उत्पादक है। चावल, गेहूं व मक्का के बाद केला चौथा सबसे बड़ा उत्पादन है। दुनिया भर में लगभग 17 मिलियन टन केले निर्यात किए जाते हैं। भारत करीब 27,575,000 टन केले का वार्षिक उत्पादन करता है। दूसरे स्थान पर चीन जिसका वार्षिक उत्पादन 12,075,238 टन के लगभग है। फिलीपिंस तीसरे नंबर पर आता है। जिसका 8,645,749 टन केला वार्षिक उत्पादन है। भारत में अधिकांश केले दक्षिणी राज्यों में उत्पादित किए जाते हैं और देश के अन्य राज्यों में निर्यात किए जाते है। भारत में केले का सबसे अधिक उत्पादन तमिलनाडु में होता है। गुजरात दूसरे व महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। तमिलनाडु में केले का वार्षिक उत्पादन 5136200 टन है।
जलवायु परिवर्तन से घट सकता है उत्पादन
एक अध्ययन के अनुसार यदि वर्तमान गति से जलवायु परिवर्तन होता रहा तो 2050 तक केले का उत्पादन कम हो जाएगा। दस देशों में केले के उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। इन दस देशों में भारत, ब्राजील, कोलंबिया, कोस्टारिका, ग्वाटेमाला, पनामा और फिलीपिंस भी शामिल है। ये सभी देश केले के प्रमुख निर्यातक भी है।
भंडारण की क्षमता सीमित
हमारे यहां केले के विपणन व भंडारण पर ध्यान कम दिया गया। यह एक जल्दी खराब होने वाला फल है। देश में भंडारण की क्षमता सीमित है। केले को लम्बे समय तक ताजा नहीं रख सकते। इसलिए इसका विपणन जल्दी किया जाता है।
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केले के निर्यात को बढ़ावा देगी सरकार
केन्द्र ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का लक्ष्य रखा है। सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सरकार केले के निर्यात को बढ़ावा देने के बारे में विचार कर रही है।
- कैलाश चौधरी, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री।
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Published on:
18 Jul 2020 07:31 pm
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