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जाति, भाषा, क्षेत्र, धर्म, रीति-रिवाज… सभी बंधनों से परे है योग

YOGA भारत की प्राचीन परंपरा से पूरे विश्व को एक अनमोल उपहार है। योग मानवता को ऋषियों और सिद्धों द्वारा दिया गया है और यह सभी की भलाई के लिए जाति, भाषा, क्षेत्र, धर्म, रीति-रिवाजों आदि की सभी बाधाओं को काटता है। - तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि

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जाति, भाषा, क्षेत्र, धर्म, रीति-रिवाज... सभी बंधनों से परे है योग

राजभवन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगासन करते राज्यपाल आर. एन. रवि।

चेन्नई. राज्यपाल आरएन रवि ने जोर देकर कहा कि योग हमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने के तरीके सिखाता है। यह प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ है जिससे जलवायु असंतुलन होता है। सामूहिक विनाश के हथियारों और परस्पर विरोधी विचारधाराओं से भरे संघर्ष से पटी दुनिया में, योग आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।

राज्यपाल ने मंगलवार को राजभवन में 8वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जिसमें विश्वविद्यालयों, स्कूलों और संस्थानों के लगभग एक हजार युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ईशा फाउंडेशन और आर्ट ऑफ लिविंग के योग प्रशिक्षकों द्वारा सुबह 6.30 बजे से 7.30 बजे तक ध्यान व योगासन कराया गया।

सभी बंधनों से परे

राज्यपाल ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि योग भारत की प्राचीन परंपरा से पूरे विश्व को एक अनमोल उपहार है। योग मानवता को ऋषियों और सिद्धों द्वारा दिया गया है और यह सभी की भलाई के लिए जाति, भाषा, क्षेत्र, धर्म, रीति-रिवाजों आदि की सभी बाधाओं को काटता है। योग स्वयं को आसपास की प्रकृति, परिवार, समाज, देश और दुनिया से जोड़ता है। उन्हें तमिलनाडु को रामेश्वरम में ऋषि पतंजलि की समाधि होने पर गर्व हैं, जो कई योग सूत्रों, एक शास्त्रीय योग पाठ के लेखक और संकलनकर्ता थे।

योग के आठ अंग

योग से जुड़े तमिलनाडु के सिद्धर तिरुमूलर व गोरखनाथ का उद्दरण देते हुए रवि ने इसके आठ अंगों का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि योग शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक नुस्खा है और आध्यात्मिक क्षेत्र में यह हमें उच्चता हासिल करने व वसुधैव कुटुम्बकम की सोच विकसित करने का अवसर देता है। इस अवसर पर दंडासन, वक्रासन, भद्रासन, वज्रासन, उत्ताना मंडुकासन, शिशु आसन, मकरासन, भुजंगासन, सेतु बंदासन, अर्ध हलासन, पवन मुक्तासन, शवासन के बाद नादिशोधन प्राणायाम आदि किया गया जिसमें राज्यपाल शामिल हुए।