
Kaira Wind Power Project
चेन्नई।वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी पहले से ही अपने भाषणों एवं रैलियों में ऊर्जा की बचत एवं उसके वैकल्पिक उपाय तलाशने की बात करते आ रहे हैं लेकिन दक्षिण रेलवे इस सुझाव को अब गंभीरता से लेते हुए इसे चरितार्थ करने में पूरे जोर-शोर से लगा हुआ है।
दरअसल दक्षिण रेलवे महाप्रबंधक आर.के. कुलश्रेष्ठ के निर्देश पर रेल सेवाओं एवं सुविधाओं में वैकिल्पिक ऊर्जा श्रोतों का प्रयोग इसी प्रयास का हिस्सा है। इसके लिए दक्षिण रेलवे ने मदुरै से लगभग 200 किलोमीटर दूर कयतर में १०.५ मेगावाट के पवन ऊर्जा परियोजना की स्थापना की है। कयतर में स्थापित पांच विंड मिल प्लांट में प्रत्येक की क्षमता 2.1 मेगावाट है।
अधिकारियों के मुताबित प्लांट को स्थापित करने का काम पूरा हो चुका है तथा 12 फरवरी को इनके 96 घंटों का पूर्व परीक्षण भी पूरा कर लिया गया। रेलवे एनर्जी मैनेजमेंट कैपसिटी लिमिटेड (आरईएमसीएल) ने इस परियोजना को लगाने की जिम्मेदारी मेसर्स सुजलोन एनर्जी लिमिटेड को दिया था। कंपनी को दी गई 66.7 करोड़ रुपए वाली इस परियोजना में इसके 10 सालों के परिचालन एवं मरम्मत का काम भी शामिल है। उन्होंने आगे बताया कि इस विंड परियोजना से उत्पादित ऊर्जा को समयनल्लूर, कोविलपट्टी, विंची मनियाची, विरुधुनगर, वैयमपट्टी और तिरुचि रेलवे स्टेशनों से जोड़ा जाएगा।
दक्षिण रेलवे ने 13 जोड़ी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में एचओजी सुविधा प्रदान की है। इससे 9.42 लाख लीटर डीजल की बचत होगी जिसकी अनुमानित कीमत 74 करोड़ रुपए सलाना है। गौरतलब है कि विभिन्न ऊर्जा संरक्षण प्रयासों के तहत पिछले साल की तुलना में इस साल ६.२९ प्रतिशत ऊर्जा की बचत हुई है। दरअसल पिछले साल यह आंकड़ा ८४१.१५ लाख यूनिट था जो अब घटकर ७८८.६४ लाख यूनिट हो गया है।
स्टेशनों पर एलईडी लाइटिंग सुविधा से करोड़ों की बचत दक्षिण रेलवे से मिले आकड़ों के मुताबिक अब तक ७३५ रेलवे स्टेशन की इमारतों में १०० प्रतिशत एलइडी लाइट लगा दी गई है। इससे प्रतिवर्ष ७९.८ लाख यूनिट ऊर्जा तथा 6.48 करोड़ रुपए की बचत की जा सकेगी। ऊर्जा संरक्षण के लिए अपनाए गए उपायों के बारे में बातचीत के दौरान अधिकारियों ने बताय कि 25 रेलवे स्टेशनों की इमारतों और प्लेटफार्मों पर 4 मेगावाट के सोलर प्लांट लगाए जाने की योजना है। इससे बिजले के लिए पारंपरिक ऊर्जा श्रोतों पर निर्भरता कम होगी। इसके अलवा तमिलनाडु एवं केरल के 48 जगहों पर 4-4 मेगावाट के सोलर प्लांट लगाने की भी योजना है।
विद्युतीकरण का काम जोरों पर
दक्षिण रेलवे के प्रमुख मार्गों पर विद्युतिकरण का काम पूरे जोर-शोर से जारी है। इसके तहत दक्षिण रेलवे के ५०८१ आरकेएम में से ३०८९ आरकेएम के विद्युतिकरण का काम पूरा हो चुका है। पिछले दो सालों के दौरान 350 करोड़ रुपए की लागत से रिकार्ड समय में ईरोड-दिंदिगुल (१३९ किमी) और सेलम-करुर-तिरुचिरापल्ली (१५१ किमी) मार्ग पर विद्युतिकरण का काम पूरा कर लिया गया है। दरअसल ये दोनों रुट दक्षिण रेलवे के मुख्य इंटरकनेक्शन वाले मार्ग हैं।
इससे वाया तिरुवनंतपुरम चेन्नई से कन्याकुमारी और मदुरै (तमिलनाडु) के बीच कनेक्टिविटी की सुविधा में काफी सुधार आया है। इसके अलाावा इस साल विल्लुपुरम-मइलादुरै जंक्शन-तंजावुर (२०३ किमी) के रुट पर भी २५० करोड़ रुपए की परियोजना का काम आवंटित कर दिया गया है। दक्षिण रेलवे ने वर्ष २०१९-२० में तिरुचिरापल्ली-तंजावुर (५० किमी), तंजावुर-करैकल पोर्ट (१०३ किमी) और विल्लुपुरम-कडलुर पोर्ट (५० किमी) रुटों पर भी विद्युतिकरण का काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया है।
ऊर्जा उत्पादन में स्वावलंबी बनने में लगा है दक्षिण रेलवे
वर्ष २०१८-१९ के वित्तीय वर्ष के अंत तक इस पवन ऊर्जा संयंत्र को शुरू कर दिया जाएगा। मार्च महीने में रेलवे इसकी शुरुआत पर विचार कर रहा है। इस पावर प्लांट से उत्पादित ऊर्जा को पावर ग्रिड को दिया जाएगा और दक्षिण रेलवे अपनी जरूरत के अनुसार इसे व्यवहार में लाएगा। दक्षिण रेलवे की ऊर्जा जरूरत काफी ज्यादा है और हम ऊर्जा उत्पादन में स्वावलंबी होने के प्रयास में लगे हुए हैं। इस प्लांट के सफल परीक्षण के बाद दक्षिण रेलवे दूसरे विकल्प व परियोजना पर विचार करेगा। आर.के. कुलश्रेष्ठ, महाप्रबंधक, दक्षिण रेलवे
Published on:
16 Mar 2019 11:49 pm
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