18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कांची मठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती हुए ब्रह्मलीन

मुस्लिम लोग भी उनके दर्शन करने पहुंचे। दर्शन करने के लिए लम्बी कतार लग गई।

3 min read
Google source verification
kanchi mutt head shankaracharya jayendra saraswathi passes away in TN

kanchi mutt head shankaracharya jayendra saraswathi passes away in TN

चेन्नई.

कांची शंकर मठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती दिल का दौरा पडऩे के बाद बुधवार सुबह ब्रह्मलीन हो गए। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती 82 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। हाल ही में उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद कांचीपुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जयेंद्र सरस्वती को साल 1994 में कांची मठ का प्रमुख बनाया गया था।


शंकराचार्य के मोक्ष की गति पाने की ख़बर के साथ भक्तों में शोक की लहर फैल गई। शंकर मठ में उनकी वैकुण्ठी तैयार कर उनकीपार्थिव देह को विराजित किया गया ताकि श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन कर सके। मुस्लिम लोग भी उनके दर्शन करने पहुंचे। दर्शन करने के लिए लम्बी कतार लग गई।

शंकर मठ के अनुसार सुबह नौ बजे उनका देहावसान हुआ। गुरुवार सुबह आठ बजे बाद काँची मठ में ही महापेरिवा चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के वृंदावन (समाधि) के पास ही उनको समाधिस्थ किया जाएगा।

इन्होंने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा कि शंकराचार्य हमेशा हमारे दिल में जिंदा रहेगें। उन्होंने समाज के लिए काफी किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शंकराचार्य के साथ अपनी पुरानी तस्वीरें भी साझा कीं।


उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कांची मठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन पर शोक जताया और आध्यात्मिकता के प्रसार में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि कांची पीठाधिपति जयेंद्र सरस्वती को मेरी श्रद्धांजलि।

उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। मानव कल्याण और आध्यात्मिकता के प्रसार में उनका योगदान अन्य के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।


सुरेश प्रभु और ममता बैनर्जी ने किया दुख प्रकट किया
राम माधव के अलावा केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने भी शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ब्रह्मलीन हो जाने पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि जयेंद्र सरस्वती जी का निधन उनके लिए काफी सदमे से भरा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने भी शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वती जी के निधन पर दुख व्यक्त किया है।


नेता राम माधव ने दी श्रद्धांजलि
उनके चले जाने से न सिर्फ सनातन धर्म के लोग आहत हुए हैं बल्कि नेताओं को भी गहरा दुख पहुंचा है। बीजेपी के नेता राम माधव ने ट्वीट कर अपना दुख प्रकट किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि वह सुधारवादी संत थेए उन्होंने समाज के लिए काफी काम किए।

22 माचज़्ए 1954 को चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल का उत्तराधिकारी घोषित कर श्री जयेंद्र सरस्वती की उपाधि दी गई थी।

परंपरागत साधु-संतों से अलग थे जयेंद्र सरस्वती
जयेंद्र सरस्वती कांची कामकोटी पीठ के 69वें मठप्रमुख थे। वे 1954 में शंकराचार्य बने थे। इससे पहले 22 मार्च 1954 को चंद्रशेखेंद्ररा सरस्वती स्वामीगल ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उस वक्त वो सिर्फ 19 साल के थे।

जयेन्द्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई, 1935 को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था। 19 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग करके संन्यास ग्रहण कर लिया। जयेन्द्र सरस्वती के लाखों की संख्या में अनुयायी थे।

हालांकि जयेन्द्र सरस्वती पारंपरिक साधुओं की तरह नहीं थे। वह कई ऐसी चीजों में लिप्त रहे जिनसे प्राय: साधु-संन्यासी दूरी बनाकर रखते हैं। जयेन्द्र सरस्वती विद्वान थे। ऋग्वेद, धर्म शास्त्र, उपनिषद, व्याकरण, वेदांत, न्याय और सभी हिंदू धर्मों के ग्रथों का ज्ञान था। उनके अनुयायियों के लिए, उनकी साधना उनकी असीम भक्ति के अनुरूप थी। वह अल्प मात्रा में भोजन ग्रहण करते थे और सुविधाजनक बिस्तरों पर नहीं सोते थे. वह सभी तरह के शारीरिक सुखों से भी दूर रहते थ। साधु बनने के बाद वह सभी तरह के शारीरिक सुखों को त्याग चुके थे। जयेन्द्र सरस्वती को दर्जनों स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल्स और चाइल्ड केयर सेंटर खोलने का भी श्रेय दिया जाता है। कांची मठ इन संस्थाओं को मुफ्त या सब्सिडी पर अपनी सेवाएं प्रदान करता है।

1954 में मिली थी शंकराचार्य की उपाधि
वह कामाकोटि पीठ में हिंदुओं के 69 वें शंकराचार्य थे। जयेंद्र सरस्वती ने साल 1954 में शंकराचार्य की उपाधि हासिल की थी। वो इस मठ के द्वारा कई स्कूल, अस्पतालों का संचालन करते थे। खबरों के मुताबिक जनवरी माह में उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले वर्ष शंकराचार्य नवंबर महीने में दिल्ली आए थे।


विवादों में भी रहे हैं शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती
जयेंद्र सरस्वती जी का नाम विवादों में भी रहा है। साल 2014 में हुई कांचीपुरम मंदिर के के मैनेजर की हत्या के मामले में जयेन्द्र सरस्वती का नाम आया था लेकिन उन्हें बरी कर दिया गया था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उन्हें करीब 2 महीने न्यायिक हिरासत में रखा गया था।