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थाल पूजा का लेकर चले आइए, मंदिरों की बनावट-सा घर है मेरा…

राजस्थान पत्रिका मीडिया पार्टनर, पुष्पांजलि की प्रेम पूर्णिमा   kavi sammelan

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kavi sammelan

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चेन्नई. तन और मन है पास बहुत फिर सोच-सोच में क्यों दूरी है, हम बदले तो कहा बेवफा, वो बदले तो मजबूरी है एवं थाल पूजा का लेकर चले आइए, मंदिरों की बनावट सा घर है मेरा, आरती बनकर गूंजों दसों दिशाओं में तुम, और पावन सा कर दो शहर ये मेरा, सुनाकर देश के जाने-माने लोकप्रिय कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सक्सेना ने अपने मुक्तकों से अपना काव्य प्रारंभ किया और अपने गीत सुनाए। मौका था पुष्पांजलि के तत्वावधान में गीत महोत्सव प्रेम पूर्णिमा का। पूर्णिमा के चंद्रमा की साक्षी में आयोजित प्रेम व श्रृंगार के इस कवि-सम्मेलन को एसपीआर सिटी के मार्केट ऑफ इंडिया के खुले मैदान में आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन में श्रोता अंत तक डटे रहे। राजस्थान पत्रिका मीडिया पार्टनर था।
कवि सम्मेलन का आगाज़ आगरा से आईं कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपने गीतों से किया जिसमें प्रेम के ये पहाड़े सरल हो गए, नेह को नेह से जोड़ना आ गया, कभी अनसुनी-सी कोई धुन बजेगी, मेरे गीत भी याद आने लगेंगे, कभी आसमां को जो देखोगे गुमसुम, तो बादल कथाएं सुनाने लगेंगे आदि गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके बाद इटावा से आए डॉ. राजीव राज ने दो नैना है अपनी प्रेम कहानी में सुनाकर श्रोताओं को अपनी प्रेम कहानी में डुबो दिया। उनके प्रसिद्ध गीत यादें झीनी रे झीनी रे ने सभी श्रोताओं को अपना बचपन स्मरण करा दिया।
दिल्ली से आईं कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने अपनी प्रसिद्ध गज़ल रात भर जगी है रात, और रात भर हुई बरसात, शब के राज को चटकी चूड़ियां बताती हैं, भाई की भुजाओं के शौर्य पर भरोसा है, सरहदों पर बहनों की राखियां बताती हैं, सुनाकर सबको रोमांचित कर दिया। अपने प्रसिद्ध गीत रूप अद्भुत अविनाशी अविकार जैसे कोई प्रेम पूंज हुआ साकार, खींचता है मन उसी ओर बार-बार, तेरे जैसा छैल-छबीला देखा नहीं, देख लिया सारा संसार सुनाकर मंच पर प्रभु गोविन्द की मूर्ति स्थापित कर दी।
इसके बाद कार्यक्रम के संयोजक व संचालक गोविन्द मूंदड़ा ने अपना पहला प्रेम गीत दिल में मेरे बसी हुई है ऐसे तेरी सूरत, जैसे बसती है मंदिर में पावन कोई मूरत, तुम्हें साथ ना पाकर अक्सर मन धीरज खोता है, प्यार यही होता है प्रीतम प्यार यही होता है, सुनाकर सबको भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध रेखांकनकार संदीप राशिनकर को पुष्पांजलि कला सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन गोविन्द मूंदड़ा ने व धन्यवाद ज्ञापन गिरिराज मूंदड़ा ने किया।