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भागवत कथा में धूमधाम से हुआ कृष्ण रुक्मिणी विवाह

भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल से मथुरा गमन और फिर द्वारका पहुंचने तक की कथा सुनाई

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krishna

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भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार गिरिराज गोवर्धन पर्वत को धारण कर प्रकृति की रक्षा की थी, उसी प्रकार हमें भी प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करना चाहिए। वृन्दावन वाले पंडित बजरंग शास्त्री महाराज ने यह बात कही। वे यहांअन्नानगर शांति कॉलोनी स्थित श्री रामदयालकलावती खेमका अग्रवाल सभा भवन में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करा रहे थे। श्री अग्रवाल सभा की इकाई श्री अग्रवाल सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा के दौरान उन्होने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान कराया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने आमोद प्रमोद के साथ कई राक्षसों का संहार किया और लोगों का कल्याण। भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल से मथुरा गमन और फिर द्वारका पहुंचने तक की सम्पूर्ण कथा सुनाकर भक्तों का मन मोह लिया। इस दौरान श्री कृष्ण जन्म की अद्भुत झांकी भी प्रस्तुत की गई। कृष्ण की लीलाओं का बखान किया। उन्होंने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कृष्ण का मथुरा गमन करने एवं कंस वध आदि कथा का वर्णन किया।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान कन्हैया की ब्रज लीलाओं का वर्णन किया। भगवान कन्हैया ने इंद्र की पूजा को छुड़वा दिया और समस्त ब्रजवासियों से गोवर्धन की पूजा के लिए प्रेरित किया जिससे कुपित होकर इंद्र ने सांवर्तक नामक मेघों को आदेश दिया कि समस्त बृज पर इतनी घनघोर वर्षा करो कि इस धरा से समस्त बृज का ही नाम मिट जाए। इंद्र की आज्ञा पाते ही बृज पर घनघोर वर्षा करना प्रारंभ किया। समस्त बृज वासियों ने मिलकर भगवान कृष्ण से प्रार्थना की। तब भगवान ने अपने बाएं हाथ की कनिष्का उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र के अभिमान का नाश किया।
भगवान की मथुरा गमन की कथा में बताया कि भगवान कृष्ण ने अपने प्रिय मित्र उद्धव को गोपियों को समझाने के लिए वृंदावन भेजें। उद्धव गोपी संवाद के माध्यम से उद्धव ने गोपियों को ज्ञान के विषय में बताया कितु ज्ञान से परिपूर्ण उद्धव राधा एवं समस्त गोपियों के प्रेम के आगे झुके और राधा को गुरु बना करके बृज रज को अपने मस्तक पर लगाने लगे। रुक्मणी कृष्ण भगवान के विवाह की कथा का वर्णन भी किया गया। कुंडलपुर नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मणी भगवान कृष्ण को मन ही मन पति मान लेती हैं। सात श्लोकों के माध्यम से पालीवाल गोत्र के ब्राह्मण द्वारा भगवान कृष्ण को पत्र भिजवाती हैं। पत्र पाते ही भगवान कृष्ण कुंडलपुर की ओर आते हैं और गोरा पूजन करने के बाद जब रुक्मणी मंदिर से बाहर आती हैं तो भगवान कृष्ण रुकमणी का हरण करके ले जाते हैं।
श्री अग्रवाल सभा के अध्यक्ष इन्द्रराज बंसल ने बताया कि महानगर के विभिन्न इलाकों से भागवत सुनने के लिए भक्तगण पहुंचे। रोजाना महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई।