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स्कूल फीस पर क्या रुख था हाईकोर्ट का

आल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी, सरकार को 30 जून तक जवाब देने का नोटिस भेजा गया है।

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स्कूल फीस पर क्या रुख था हाईकोर्ट का

स्कूल फीस पर क्या रुख था हाईकोर्ट का

चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार से प्रश्न पूछा कि अगर निजी स्कूलों को फीस वसूली से रोका जाए तो वे शिक्षकों व कर्मचारियों को कैसे वेतन देंगे? सरकार को आल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया गया है।

न्यायाधीश आर. महादेवन ने मंगलवार को इस याचिका पर वर्चुअल सुनवाई की। उन्होंने मौखिक रूप से कहा कि यह सरकार की नीति है कि सभी निजी शिक्षण संस्थान शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ को वेतन का भुगतान करेंगे। मगर स्ववित्तपोषित निजी शिक्षण संस्थानों को अगर न्यूनतम फीस वसूली से भी रोका जाएगा तो वे वेतन भुगतान कैसे करेंगे जबकि उनकी ओर से ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की जा रही है।

जज ने फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स एसोसिएशन एंड कंसोर्टियम ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग प्रोफेशन्स आर्ट्स एंड साइन्स कॉलेज की याचिका पर पूछा कि जब शिक्षक ऑनलाइन क्लास आयोजित कर रहे हैं तो क्या उनको भुगतान नहीं किया जाना चाहिए? इस सवाल के साथ सरकार को ३० जून तक जवाब देने का नोटिस भेजा गया है।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. एम. विजयन ने दलील दी कि २० अप्रेल को सरकार ने आदेश जारी कर कोविड-१९ संक्रमण की वजह से निजी स्कूलों और कॉलेजों को फीस वसूली से पाबंद कर दिया। दूसरी ओर शिक्षण संस्थानों को यह भी निर्देश दिए कि वे अपने स्टाफ का वेतन नहीं रोकेंगे।
अधिवक्ता ने नजीर रखी की कि जहां अधिकार होता है वहां दायित्व साथ होते हैं। इसी तरह दायित्व के साथ अधिकार भी होते हैं। उन्होंने ताज्जुब जताया कि शिक्षण संस्थानों की आय का एकमात्र स्रोत फीस है और उसे रोक दिया जाता है तो कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कैसे किया जाएगा?
एडवोकेट विजयन ने आपदा प्रबंधन कानून २००५ के तहत जारी शासनादेश पर ही सवाल उठाया कि यह एक्ट आपदा प्रबंधन के लिए है वित्तीय प्रबंधन के लिए नहीं है। सिर्फ तमिलनाडु में इस तरह का निषेध है जबकि अन्य राज्यों में शिक्षण संस्थानों को फीस वसूली की छूट प्राप्त है।