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राष्ट्र निर्माण में संतों का अहम योगदान

संतों एवं महापुरुषों ने सदैव राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधा है। समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। राष्ट्र निर्माण में संतों का अहम योगदान रहा है। भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर (Mahamandleswar) महंत निर्मलदास (Mahant Nirmaldas Maharaj) महाराज ने रविवार को यहां साहुकारपेट तिरुपल्ली स्ट्रीट स्थित राजपुरोहित ट्रस्ट भवन में यह बात कही। वे यहां भक्तगणों को संबोधित कर रहे थे।

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Mahamandaleshwar Mahant Nirmal Das Maharaj

Mahamandaleshwar Mahant Nirmal Das Maharaj

चेन्नई. संतों एवं महापुरुषों ने सदैव राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधा है। समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। राष्ट्र निर्माण में संतों का अहम योगदान रहा है।
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर महंत निर्मलदास महाराज ने रविवार को यहां साहुकारपेट तिरुपल्ली स्ट्रीट स्थित राजपुरोहित ट्रस्ट भवन में यह बात कही। वे यहां भक्तगणों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन सदैव भक्तों के कल्याण एवं मानव सेवा को समर्पित रहता है। संतों के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति को समाज कल्याण में अपना योगदान करना चाहिए। मानव सेवा के लिए समर्पित रहें। संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। संतों के उपदेश सदैव प्रेरणादायी होते हैं जिन्हें आत्मसात कर व्यक्ति को अपना जीवन लोक कल्याण के कार्य में समर्पित करना चाहिए। इसी तरह महापुरुषों ने सदैव समाज का मार्गदर्शन कर मानव कल्याण के लिए प्रेरित करने का काम किया है।

ऋषि-मुनियों के बताए मार्ग पर चलें
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर महंत निर्मलदास महाराज ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम फिर से ऋषि-मुनियों के बताए मार्ग पर चलें। सनातन धर्म के अनुष्ठानों का बढ़ावा दिया जाएं। स्वाध्यान एवं सत्संग के मार्ग पर आने की जरूरत है। इसी से समूचे विश्व की समस्याओं का निदान संभव हो सकता है। संतों एवं महापुरुषों के बताए सिद्धांत ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारों के अभाव में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। इसलिए हमें सबसे पहले अपने परिवारों में संस्कारों को कायम करना होगा। सत्संग मानव जीवन की दिशा ही बदल देता है। संयम, धैर्य एवं शिष्टाचार सत्संग से ही मिलते हैं।
परोपकार के कार्य की सराहना
तमिलनाडु में प्रवासी समाज की ओर से किए जा रहे परोपकार के कार्य की सराहना करते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि मनुष्य को परोपकार के कार्य करने चारिए। गरीबों एवं असहायों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य हैं। व्यक्ति महान नहीं होता, व्यक्ति का कर्म महान होता है। अच्छे एवं नेक कर्म करने वाला व्य्क्ति अपने कार्यों के बल पर ही समाज की पूजा होती है।

प्रवासी समाज की ओर से स्वागत
इससे पहले भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर महंत निर्मलदास महाराज के चेेन्नई पहुंचने पर एयरपोर्ट पर प्रवासी समाज की ओर से माल्यार्पण एवं शॉल ओढाकर स्वागत किया गया। बाद में तिरुपल्ली स्ट्रीट के राजपुरोहित ट्रस्ट भवन पहुंचने पर राजपुरोहित ट्रस्ट के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से उनका माल्यार्पण से स्वागत किया गया। इस अवसर पर राजपुरोहित ट्रस्ट तिरुपल्ली स्ट्रीट के संरक्षक विशालसिंह पिलोवनी, अध्यक्ष रमेशसिंह मादा, सचिव दातारसिंह करमावास, खेतसिंह रतनपुरा, शंकरसिंह चावंडिया, मोतीसिंह डोली राजगुरां, विमलसिंह खेड़ी, अमरसिंह, अर्जुनसिंह, भूपेन्द्रसिंह रतनसिंह समेत कई गणमान्य लोगों ने महामंडलेश्वर का स्वागत किया।
कल होंगे कडप्पा के लिए रवाना
राजपुरोहित ट्रस्ट चेन्नई के अध्यक्ष रमेशसिंह मादा ने बताया कि भारत साधु समाज के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद महामंडलेश्वर महंत निर्मलदास महाराज पहली बार चेन्नई आए हैं। वे 24 फरवरी को दिन में तिरुपल्ली स्ट्रीट स्थित राजपुरोहित ट्रस्ट भवन में रहेंगे जहां प्रवासी समाज के संगठन एवं भक्तगण उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। महामंडलेश्वर 25 फरवरी को सुबह कडप्पा के लिए रवाना होंगे जहां वे एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।