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विश्व कल्याण के लिए याद किए जाते हैं त्यागमूर्ति महर्षि दधीचि

- हर्षोल्लास से मनाई महर्षि दधीचि जयंती- कोरोना की गाइडलाइन का किया पालन

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Maharishi Dadhichi

Maharishi Dadhichi

चेन्नई. सनातन परम्परा में ऐसे कई प्रकाण्ड रत्न हुए हैं जिनकी ज्योति आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करती है। ज्ञान, तप व त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति देहदानी महर्षि दधीचि विश्व कल्याण के लिए जाने जाते हैं। दाहिमा समाज के लोगों ने यह बात कही।
त्यागमूर्ति महर्षि दधीचि की जयंती बुधवार को हर्षोल्लास से मनाई गई। सरकारी गाइडलाइन के चलते महोत्सव में सीमित लोगों ने ही भाग लिया।
साहुकारपेट स्थित दधिमती माता मंदिर के प्रांगण में आयोजित समारोह में समाज के लोगों ने कहा कि महर्षि दधीचि ने बुराई के प्रतीक वृत्रासुर का अन्त करने के लिए देवताओं के आग्रह पर देह त्याग कर अपनी अस्थियां दान की। यह विश्व कल्याण के लिए स्वयं का समर्पण एवं बलिदान का सर्वोच्च उदाहरणों से एक है।
दाहिमा समाज के लोगों ने कहा कि आज जब संपूर्ण विश्व वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहा है जिसका निदान अभी तक संभव नहीं हो पाया है। फिर भी कुछ हद तक इसका निदान प्लाज्मा थैरेपी से हो रहा है जिसके दान का आग्रह सरकार आज की युवा पीढ़ी से किया जा रहा है। ऐसे दानवीर त्यागमूर्ति महर्षि दधीचि की जयंती महोत्सव मनाया गया।
पूजा समेत कई आयोजन
मंदिर प्रांगण में बीज मंत्र दधिमती यंत्र की स्थापना आचार्य विजयप्रकाश तिवारी के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार से पूजन, अभिषेक, अर्चन एवं हवन वैदिक प्रणाली से हुआ। इस पूजन एवं हवन में विनोद खटोड़ व्यास सपरिवार शामिल हुए। इस मौके पर भक्तों ने दर्शन किए एवं प्रसाद वितरण किया गया।
कई गणमान्य लोग हुए शामिल
कोषाध्यक्ष नारायण दाहिमा ने बताया कि महोत्सव में न्यासी रघुनाथ हिसौडिय़ा, वेंकदेश दाहिमा, अध्यक्ष दामोदर सूंठवाल, उपाध्यक्ष गोपाल व्यास, वरिष्ठ सदस्य दीनदयाल व्यास, अशोक डोबा, प्रदीप तिवारी, गोविन्द तिवारी विनोद एवं अन्य पदाधिकारी व सदस्य शामिल हुए।