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गांधी का अहिंसा का संदेश आज भी प्रासंगिक

गांधी का अहिंसा का संदेश आज भी प्रासंगिकमहात्मा गांधी की जयंती पर वेबीनार

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mahatma gandhi

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चेन्नई. महात्मा गांधी ने अहिंसा एवं सत्य पर बल दिया था। उनके स्वतंत्रता में दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
रिजनल आउटरिच ब्यूरो तमिलनाडु एवं पुदुचेरी के संयुक्त निदेशक जे. कामराज ने यह बात कही। वे महात्मा गांधी के 151 वीं जन्म जयंती के मौके पर वेबीनार में बोल रहे थे। फिल्ड आउटरिच ब्यूरो तंजावुर एवं राजकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय ओरथान्डु की ओर से आयोजित वेबीनार में उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के माध्यम से जीत हासिल की थी। इसे एक हथियार के रूप में काम में लिया।
तिरुचि रिजन के फिल्ड प्रसार अधिकारी के. देवी पदमनभन ने कहा, यह वेबीनार देश को दो महान पुरुषों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी ने किस तरह से समूचे विश्व को प्रभावित किया। अहिंसा के जरिए उन्होंने बहुत कुछ हासिल कर लिया।

समस्याएं जानने के लिए किया सत्याग्रह
राजकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय ओरथान्डु के प्राचार्य डॉ. एस. बानुमति ने गांधी के सत्याग्रह, अहिंसा एवं सत्य के बारे में बताया। गांधी ने देश में लोगों की समस्याओं को जानने के लिए सत्याग्रह किया। खादी को प्रमोट करने में उनका विशेष योगदान रहा।
शोध सलाहकार डॉ. के. कलैचेल्वी ने कहा, हमारी संस्कृति भले ही अलग-अलग हैं लेकिन हम एक है। यही एक भारत श्रेष्ठ भारत की पहचान है यानी विविधता में भी एकता। तमिलनाडु व जम्मू-कश्मीर का रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज भिन्न-भिन्न भले ही है, लेकिन देश के एकता व अखंडता के लिए सभी साथ है।
फिल्ड प्रचार सहायक अरुणकुमार ने कहा, वेबीनार के आयोजन का उद्देश्य लोगों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरुकता का संचार करना था। लोगों तक एक साथ नहीं पहुंच सकते लेकिन वेबीनार ऐसा माध्यम हैं जिससे हम बहुत से लोगों से एक साथ जुड़ सकते हैं।