18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चेन्नई

video : ‘रात भर जगी है रात और रात भर हुई बरसात…..राज को चटकी चूड़ियाँ बताती हैं’

थाल पूजा का लेकर चले आइए, मंदिरों की बनावट-सा घर है मेरा

Google source verification

चेन्नई. महानगर में पूर्णिमा के चंद्रमा की साक्षी में आयोजित ‘प्रेम पूर्णिमा’ कवि सम्मेलन में एक से बढ़कर एक कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘पुष्पांजलि’ द्वारा 5 फरवरी 2023 को आयोजित प्रेम व श्रृंगार के इस कवि-सम्मेलन का आयोजन एसपीआर सिटी के मार्केट ऑफ इंडिया के विशाल खुले मैदान में किया गया जहां 1000 से भी अधिक श्रोताओं ने एक से बढ़कर एक कविताओं, गीतों और गजलों का रसपान किया। राजस्थान पत्रिका कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर था।

कवि सम्मेलन का आगाज़ आगरा से आईं कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपने गीतों से किया जिसमें ‘प्रेम के ये पहाड़े सरल हो गए, नेह को नेह से जोड़ना आ गया, कभी अनसुनी-सी कोई धुन बजेगी, मेरे गीत भी याद आने लगेंगे, कभी आसमाँ को जो देखोगे गुमसुम, तो बादल कथाएं सुनाने लगेंगे इत्यादि गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया।

इसके पश्‍चात् इटावा से आए डॉ. राजीव राज ने ‘दो नैना है अपनी प्रेम कहानी में’ सुनाकर श्रोताओं को अपनी प्रेम कहानी में डुबो दिया। उनके प्रसिद्ध गीत ‘यादें झीनी रे झीनी रे’ ने सभी श्रोताओं को अपना बचपन स्मरण करा दिया।

 

‘रात भर जगी है रात और रात भर हुई बरसात.....राज को चटकी चूड़ियाँ बताती हैं’

दिल्ली से आईं कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने अपनी प्रसिद्ध गज़ल ‘रात भर जगी है रात, और रात भर हुई बरसात, शब के राज को चटकी चूड़ियाँ बताती हैं’ ‘भाई की भुजाओं के शौर्य पर भरोसा है, सरहदों पर बहनों की राखियां बताती हैं’ सुनाकर सबको रोमांचित कर दिया। ‘रूप अद्भुत अविनाशी अविकार जैसे कोई प्रेम पुंज हुआ साकार, खींचता है मन उसी ओर बार-बार, तेरे जैसा छैल-छबीला देखा नहीं, देख लिया सारा संसार’ सुनाकर मंच पर प्रभु गोविन्द की मूर्ति स्थापित कर दी।

 

कार्यक्रम के संयोजक व संचालक श्री गोविन्द मूंदड़ा ने अपना पहला प्रेम गीत ‘दिल में मेरे बसी हुई है ऐसे तेरी सूरत, जैसे बसती है मंदिर में पावन कोई मूरत, तुम्हें साथ ना पाकर अक्सर मन धीरज खोता है, प्यार यही होता है प्रीतम प्यार यही होता है.. सुनाकर सबको भाव-विभोर कर दिया।

अंत में देश के जाने-माने लोकप्रिय कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने ‘तन और मन है पास बहुत फिर सोच-सोच में क्यों दूरी है, हम बदले तो कहा बेवफा, वो बदले तो मजबूरी है और ‘थाल पूजा का लेकर चले आइए, मंदिरों की बनावट सा घर है मेरा, आरती बनकर गूंजो दसों दिशाओं में तुम, और पावन सा कर दो शहर ये मेरा’, सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रेखांकनकार संदीप राशिनकर को ‘पुष्पांजलि कला सम्मान’ प्रदान किया गया। धन्यवाद ज्ञापन गिरिराज मूंदड़ा ने किया।