
शिवरात्रि से पहले तमिलनाडु के इस मंदिर में हुआ अद्भुत चमत्कार
तमिलनाडु के चेंगलपेट जिले का तिरुकल्लीकुंड्रम पक्षी तीर्थ नाम से प्रसिद्ध है। यहां के प्रसिद्ध वेदगिरीश्वरर मंदिर के सरोवर से बारह साल बाद शंख निकला, जिससे भक्तों में हर्ष की लहर दौड़ गई। शंख की विशेष पूजा अर्चना हुई जिसे देखने बड़ी संख्या में भक्तगण उमड़े। महत्वपूर्ण बात यह है कि बारह साल के अंतराल में से इस सरोवर से एक नया शंख प्रकट होता है, इस कारण इसे शंख तीर्थ नाम से जाना जाता है।
परम्परा के अनुसार जब भी शंख तीर्थ से शंख प्रकट होकर तट से सटता है, मंदिर के पुजारी उसकी विशेष पूजा अर्चना करते हैं और फिर कार्तिक महीने के अंतिम सोमवार के दिन पहाड़ी पर िस्थत वेदगिरीश्वरर मंदिर आयोजित होने वाले 1008 शंखाभिषेकम में इस शंख की प्रधानता रहती है। पिछली बार 1 सितंबर 2011 को शंख तीर्थ से शंख निकला था। बारह साल का समय बीतने के साथ ही स्थानीय लोगों और भक्तों को नए शंख के आगमन का बेसब्री से इंतजार था।
ऐसे में गुरुवार सुबह मंदिर दर्शनार्थ आए श्रद्धालुओं की नजर तालाब में तैर रहे शंख पर पड़ी। भार-विभोर श्रद्धालुओं ने तत्काल मंदिर प्रशासन को इसकी खबर की। इस बीच यह खबर तेजी से फैल गई और मंदिरों में भक्तगणों की भीड़ लग गई। मंदिर के पुजारियों ने शंख को प्रतिष्ठित कर विशेष पूजा अर्चना की। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले निकले सात शंखों को सुरक्षित रखा गया है। यह इस कड़ी में आठवां है।
जातक कथा के अनुसार एक बार मार्कण्डेय ऋषि सभी शिवालयों का दर्शन करते हुए तिरुकल्लीकुंड्रम के वेदगिरीश्वरर मंदिर पहुंचे। शिवलिंग को जल चढ़ाने के लिए उस समय उनके पास पात्र नहीं था। इस वजह से उन्होंने सरोवर में शिव से प्रार्थना की और माना जाता है कि एक शंख प्रकट हुआ जिससे ऋषि ने जलाभिषेक किया। तब से इस सरोवर को शंख तीर्थ का नाम मिला। जनश्रुति के अनुसार उस काल से इस तीर्थ से बारह साल में एक बार शंख निकलता है। शिवरात्रि से पहले शिवालय में निकले शंख से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया है।
Updated on:
08 Mar 2024 06:19 am
Published on:
07 Mar 2024 07:27 pm
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