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मंदिर की महिमा : तीनों कालों पर नजर रखती हैं देवी मुप्पत्तम्मन

मंदिर के सामने अनेक शिल्पों से अलंकृत गोपुर दिखाई देता है। तमिल में एक कथन है। देवी मां का मुख उत्तरोन्मुखी है। गर्भ गृह के चारों ओर अन्य उपदेवी-देवताओं के लिए अलग-अलग छोटे-छोटे मंदिर हैं।

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मंदिर की महिमा : तीनों कालों पर रखती है देवी मुप्पत्तम्मन

त्यागराय नगर (टी. नगर) स्थित देवी मुप्पत्तम्मन का प्रसिद्ध मंदिर

डा. वत्सला किरण

चेन्नई. महानगर के त्यागराय नगर (टी. नगर) में देवी मुप्पत्तम्मन नाम से मंदिर हैं। माता करुणामयी, इष्ट वरदायिनी तथा दीनवत्सला है। इनको पराशक्ति का प्रतिरूप माना जाता है। जिनका संबंध काल की गति से है।
स्थल पुराण : भक्तों पर करुणा की वर्षा करने मां के अवतरण के संबंध में भी विभिन्न कथाएं प्रचलित हैं। पहली जनश्रुति के अनुसार यह प्रदेश पहले उपजाऊ खेत था। साल में तीन फसल होने की वजह से इस भूमि को मुभोग वाली (तीन भोगवाली) भूमि कहते थे। तीन भोगों वाली भूमि से निकली माँ याने मुप्पत्तम्मन (अम्मन यानी माँ)। देवी के प्रकटीकरण की कथा के अनुसार एक बार भारी वर्षा के कारण खेत-खलिहान सब डूब गये। कन्नियप्पन नामक एक किसान अपने खेत की दशा देखने के लिए उस भारी वर्षा में घर से निकला । उसने एक अद्भुत दृश्य देखा। वर्षा के पानी में दिव्य ज्योति से युक्त एक देवी की मूर्ति बह कर आ रही थी। एक जगह पर आकर वह मूर्ति रुक गई। कन्नियप्पन ने भक्ति भाव से मूर्ति को प्रणाम किया और हाथों से उठा लिया। अचानक वर्षा थम गई। लोगों ने मान लिया कि यह उनका त्राण करने के लिए आयी देवी हैं। लोगों ने मिलकर अपनी शक्ति के अनुसार वहाँ एक छोटा सा मंदिर बनवाया और उस मूर्ति की प्रतिष्ठा की, भक्ति भाव से पूजा आराधना की। दीवारों पर देवी के विभिन्न रूपों के चित्र भी अंकित है।

यहाँ का स्थलवृक्ष नीम है। दूसरी जातक कथा के अनुसार आम के पेड़ों की बहुलता से प्रसिद्ध माम्बलम (टी. नगर) की यह देवी त्रिनेत्र शक्तिधारिणी हैं। देवी तीनों आंखों से तीनों कालों का निरीक्षण और नियंत्रण करती हैं। इसलिए देवी मुप्पत्तम्मन को मुप्पार्तम्मन भी कहा जाता था। कालांतर में यह नाम मुप्पत्तम्मन हो गया। देवी की महिमा की गाथा धीरे-धीरे चारों ओर फैलने लगी और भक्तों का सैलाब उमडऩे लगा।

मंदिर की संरचना

मंदिर के सामने अनेक शिल्पों से अलंकृत गोपुर दिखाई देता है। तमिल में एक कथन है। देवी मां का मुख उत्तरोन्मुखी है। गर्भ गृह के चारों ओर अन्य उपदेवी-देवताओं के लिए अलग-अलग छोटे-छोटे मंदिर हैं। वे इस प्रकार हैं- बाईं ओर से गणेश, पत्नियों सहित कर्तिकेय, मणिकण्ठन, आंजनेय, नवग्रह आदि हैं। नवग्रह के बाद पुन: एक महागणपति मंदिर है। उसके समीप बड़ी-सी बाँबी है जिस के शिखर पर पाँच फण वाले नाग की बड़ी मूर्ति है। गोलाकार बाँबी के चारों ओर पत्थर से बनी कई नागमूर्तियाँ हैं। आगे चलने पर एक हाल जैसा स्थान है जहाँ विष्णुमाया, तिरुप्पति वेंकटाचलपति, नंदी सहित महादेव आदि कई अन्य मूर्तियाँ भी हैं। दीवारों पर देवी के विभिन्न रूपों के चित्र भी अंकित है।

देवी का स्वरूप

चार हाथों वाली माँ के दायें भाग के एक हाथ डमरू और दूसरे हाथ में त्रिशूल धारण किए हैं, बायें भाग में ऊपर के हाथ में पाशांकुश और निचले हाथ में कुंकुम भरा पात्र है। दायें पाँव के नीचे असुर को दबा रखा है। इस तरह नयन मनोहर रूप में माँ भक्तों पर कृपावृष्टि करती हुई दर्शन दे रही हैं। मंदिर में चित्तिरै (चैत्र) पूर्णिमा, कार्तिक दीपम, आडि महोत्सव और नवरात्र के वक्त भक्तों की सरिता बहने लगती है।