संगीत के महत्व को शब्दों में बयां करना आसान नहीं

आज विश्व संगीत दिवस पर विशेष...

संगीत के महत्व को शब्दों में बयां करना आसान नहीं
संगीत का सेहत से गहरा संबंध, हर राग जीवन से जुड़ा
दुनियाभर में संगीत के दीवानों की कमी नहीं

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 20 Jun 2021, 10:04 PM IST

चेन्नई. संगीत में जादू जैसा असर है। भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के द्वारा मधुर तान छेड़कर तीनों लोकों को मोह लिया था। प्रकृति के कण-कण में संगीत की सजीवता विद्यमान होती है। दुनियाभर में म्यूजिक के दीवानों की कमी नहीं है। चाहे आप खुश हो या दुखी, संगीत आपके मूड के हिसाब से काम करता है। हम सब जानते हैं संगीत हमारा एक ऐसा दोस्त है जो हमारे तनाव को दूर करके हमारे मूड को बेहतर बनाने का काम करता है। आज की भागदौड़ भरी जिदंगी में लोगों को कई प्रकार की मानसिक परेशानियों, तनाव और अन्य समस्याओं से जूझना पड़ता है और संगीत इन सबसे उबरने में मददगार साबित हो सकता है।
जिस तरह 21 जून को विश्‍व योगा दिवस मानाया जाता है ठीक उसी प्रकार 21 जून को विश्व संगीत दिवस भी मनाया मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। इसको मनाने का उद्देश्य अलग-अलग तरीके से म्यूज़िक का प्रोपेगेंडा तैयार करने के अलावा एक्सपर्ट व नए कलाकारों को एक मंच पर लाना है। विश्व में सदा ही शांति बरकरार रखने के लिए ही फ्रांस में पहली बार 21 जून 1982 में प्रथम विश्व संगीत दिवस मनाया गया था। इससे पहले अमरिका के एक संगीतकार योएल कोहेन ने साल 1976 में इस दिवस को मनाने की बात की थी। वैसे इस दिन की शुरुआत संगीत की सुखदायक प्रकृति के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन इसके मनाने के और कारण भी हैं।
दिमाग में आनन्द की अनुभूति
ऐसा माना जाता है कि हर ‌किसी शख्स के साथ अपने पसंद की गीत सुनने के दौरान मन झुमने लगता है, ‌दिमाग में आनंद छा जाता है, कभी ‌किसी धुन पर आंसू तक ‌निकल आते हैं। दरअसल मनोवैज्ञा‌निक भी मानते हैं ‌कि संगीत का सेहत से गहरा संबंध है। संगीतकारों का कहना है ‌कि हर राग जीवन से जुडा है और तन मन तो स्वत: रागों में खो जाते हैं। आदि काल से संगीत का सेहत पर पडने वाले साकारात्मक पहलू को ही अब संगीत थैरेपी का नाम दे ‌दिया गया है। अब ‌विज्ञान के क्षेत्र में संगीत के सेहत से संबंध पर शोध हो रहे हैं।
जीवन के हर मोड को करता हैं पूरा
संगीत के महत्व को शब्दों में बयां करना इतना आसानी नहीं है क्योंकि किसी के लिए संगीत साधन तो किसी के लिए साधना है। कठिन समय में किसी के लिए जीने का हौंसला तो बुरे दौर में किसी की ताकत और राहत। दरअसल संगीत एक ऐसा माध्यम है जो हमारे जीवन में कई मोड़ पर हमारी जरूरतों को पूरा करता है। साफ सब्दों में कहा जाए तो जिंदगी का वजूद ही संगीत से जुड़ा हुआ है।
हर बीमारी की दवा हैं संगीत
संगीत शरीर की कई बीमारियों का इलाज करने में भी सहायक है क्योंकि यह आत्मा का उन्नयन करता है। संगीत सुनने से दिमाग को शांति मिलती है जिसके कारण तनाव और अनिद्रा की समस्या से छुटकारा मिलता है। रोजाना सुबह-शाम कुछ देर तक संगीत सुनने से उच्च रक्तचाप की बीमारी में सुधार होता है, वहीं धीमी गति का संगीत सुनने से स्ट्रोक की समस्या दूर होती है। योग से हम स्वस्थ्य रहते हैं उसी तरह हम संगीत से भी स्वस्थ्य व प्रसन्न रहते हैं। कहा जाता है कि प्रकृति के कण-कण में संगीत का सुर सुनाई देता है। संगीत यानी सुख-दुख का साथी है संगीत जिससे हम कभी नहीं दूर रह सकते।
.............................


हमारे जीवित होने का प्रमाण है संगीत
संगीत केवल गीतों भजनों और वाद्य यंत्रों से उत्पन्न ध्वनि को ही नहीं समझा जाना चाहिए। यह तो सृष्टि के कण कण में व्याप्त है।हमारे शरीर की हर कोशिका में संगीत बजता है। दिल की धड़कन में संगीत है।धमनियों में रक्त प्रवाह का संगीत है। चाल में संगीत है। विचार में संगीत है। कहने का तात्पर्य है कि हमारे जीवित होने का प्रमाण है संगीत।संगीत ही जीवन है तो संगीत ही अध्यात्म है जो कि हमें ईश्वर से जोड़ता है। संगीत की यही समझ उसकी सच्ची परिभाषा है। इस परिभाषा को सब समझ सके तो सार्थक संगीत दिवस है। कहते हैं ना मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा।तभी संगीत सकारात्मक है सुरीला है शांति और आनंददायक है अगर सुर न मिले तो सब कुछ नकारात्मक हो जाता है। जीवन बेसुरा हो जाता है।संगीत दिवस जीवन को सुरीला बनाने का एक सुंदर प्रयास है।
- रेनू आर्या अग्रवाल, गायिका, चेन्नई.
...................

ASHOK SINGH RAJPUROHIT
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned