
National Conference on Corporate Innovation
चेन्नई।इंडियन सोसाइटी आफ ट्रेनिंग एंड डवलप्मेंट की ओर से 47वां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का विषय कारपोरेट इनोवेशन था। इसमें स्थिर विकास के प्रेरणादायी कहानियां सुनाई गई।
आईओसीएल नई दिल्ली के एचआर निदेशक रंजन कुमार मोहापत्रा ने इसका उद्घाटन किया। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.आर.कार्तिकेयन तथा आईआईएम कोझिकोड के संस्थापक निदेशक डा.विनयशील गौतम उपस्थित थे। सम्मेलन में 50 शहरों के 400 से अधिक एचआर पेशेवरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने मानव संंबंधों में संस्कृति, प्रासंगिक, मनोवैज्ञानिक तथा आर्थिक तत्वों के एकीकरण को शामिल करने के लिए नवाचार पर बल दिया। साथ ही साधारण विचार जरिए आवश्यक चिकित्सा जरूरत एवं प्रौद्योगिकी के जोडऩे के महत्व पर भी चर्चा की गई।
(कार्यालय संवाददाता)
सरकारी निर्देशों को ठेंगा दिखाते प्राइवेट स्कूल
उस समय धर्मपुरी जिले के लोगोड्ड में खुशी की लहर दौड़ गई थी, जब तमिलनाडु सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस संग्रहण के लिए नियम तय कर दिए थे। नियमानुसार प्राइवेट स्कूलों में छात्रों से स्कूल में दी जा रही सुविधाओं के आधार पर ही शुल्क लिया जाए। अतिरिक्त क्रियाओं के नाम पर शुल्क की उगाही करने पर कार्रवाई की जाएगी। यह नियम जिले के १५५ स्कूलों पर लागू किया गया था। लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि जिले के अधिकांश प्राइवेट स्कूल सरकार के निर्देश को ठेंगा दिखाते हुए अधिक शुल्क वसूलते हैं।
जानकारी के अनुसार प्राइवेट स्कूलों में बिना रसीद के कई ऐसे शुल्क वसूले जाते हैं जिनका कोई आधार ही नहीं है। ऐसे शुल्कों को लेकर स्कूलों और अभिभावकों में लगातार ठन रही है। हालांकि कई अभिभावक शिक्षा विभाग का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसकी मेहरबानी से ही प्राइवेट स्कूलों में पठन-पाठन की गुणवता में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह अलग बात है कि कुछ प्राइवेट स्कूल गैर-वाजिब फीस लेने से बाज नहीं आते। यहां गौरतलब है कि निजी स्कूल शुल्क निर्धारण समिति की एक बैठक में अध्यक्ष गोविंदराजन ने कहा था कि प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों को अभिभावकों से अनुचित शुल्क लेने से बचना चाहिए।
इतर क्रियाओं के नाम पर वसूली
अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल बच्चों से अलग से पैसे ऐंठने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अलग-अलग एक्टीविटीज के नाम पर बच्चों से अलग शुल्क मांगते हैं। एक अभिभावक सुंदरम ने बताया कि उनका बेटा आठवीं कक्षा में पढ़ता है। जिसके दाखिले के लिए स्कूल, सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क से ६ हजार रुपए अधिक मांग रहा है और अतिरिक्त शुल्क की रसीद देने से इंकार कर रहा है। उन्होंने जब स्कूल प्रशासन से सवाल किया तो उनका कहना था कि अगर आप फीस चुकाने में सक्षम नहीं हैं तो क्यों इस स्कूल में नामांकन करवाते हो?
बहरहाल सुंदरम की तरह कई अभिभावक होंगे जिनसे प्राइवेट स्कूल अधिक फीस वसूलते हैं। वैसे कई ऐसे अभिभावक भी है जो निजी स्कूलों को अवैध शुल्क चुकाने को तैयार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का डर रहता है उनके बच्चों के साथ सख्त व्यवहार हो सकता है।
एक अभिभावक प्रिया ने बताया कि हमें सिर्फ ५५०० रुपए चुकाने थे लेकिन उन्होंने १३००० चुकाए क्योंकि उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था।
उनको इस बात का डर था कि अगर वे स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जाएंगे तो उनके बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ाया जाएगा।
बहरहाल जिले के बहुतेरे मेट्रिकुलेशन और सीबीएसई स्कूल सरकारी नियम को ताक पर रखते हुए फीस वसूलते जा रहे हैं। वहीं पापीरेड्डीपट्टी के निवासी अभिभावक जनार्दन का कहना था कि उन्होंने अपनी पांच साल की बच्ची को पहली कक्षा में दाखिले के लिए पंद्रह हजार रुपए स्कूल को अदा किए हैं, जबकि उन्हें किसी प्रकार की रसीद नहीं दी गई है। इसलिए जिला प्रशासन को इन प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
इस सिलसिले में धर्मपुरी जिला शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही। वहीं शिक्षा विभाग का कहना था कि अब तक किसी अभिभावक ने निजी स्कूलों के खिलाफ लिखित शिकायत नहीं की है।
Published on:
10 Jun 2018 05:53 am
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