
National hindi seminar
चेन्नई. तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने कहा मातृभाषा मां के समान है। तमिल मां हैं तो हिंदी मौसी। हमें मां के साथ मौसी की भी जरूरत है। तमिल व हिंदी दोनों का तालमेल रहना चाहिए। तमिल मातृभाषा, हिंदी संपर्क भाषा व अंग्रेजी तीसरी भाषा के रूप में सीख सकते हैं। जितनी ज्यादा भाषा सीखेंगे उतना ही हमारे लिए अच्छा है। भाषाओं से प्रेम बढ़ता है। विविधता में एकता ही भारत की संस्कृति है। सभी भाषाओं से प्रेम करें। हिंदी के लिए बहुत स्कोप हैं। हिंदी का विरोध तो होना ही नहीं चाहिए। राज्यपाल गुरुवार को यहां स्टेला मैरिस कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं : नए आयाम विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा दक्षिण के लोग भी हिंदी सीखकर रोजगार हासिल कर सकते हैं। खासकर पर्यटन के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। गाइड बनकर भी रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। संपर्क भाषा को हिंदी के रूप में अपनाएं। मौजूदा बाजारवाद के युग में हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। हिंदी को सूचना तकनीक के साथ जोडऩे से इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है। आज हिंदी भारत की सीमाओं को लांघकर बहुत आगे निकल चुकी है।
लेखन के स्तर पर आदान-प्रदान जरूरी
विशिष्ट अतिथि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलपति प्रो. राममोहन पाठक ने कहा समस्त भारतीय भाषाओं एवं हिंदी में संवाद होना चाहिए। संवाद व लेखन के स्तर पर आदान-प्रदान जरूरी है तभी हिंदी को वह स्थान दे पाएंगे जिसकी कल्पना महात्मा गांधी ने की थी। इस मौके पर शिवयोगी नीरलकट्टी व मोहन मूथा एक्सपोटर््स के प्रफुल्ल मूथा व कालेज की सचिव सुसन मथैकल भी मंच पर मौजूद थी। महाविद्यालय की छात्राओं देवप्रयागा, लक्ष्मीप्रिया व गायत्री ने कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम व भरतनाट्यम नृत्य पेश किया।
पुस्तक के तमिल अनुवाद का विमोचन
इस अवसर पर आर.एफ.नीरलकट्टी, प्रो. राममोहन पाठक, निर्मल भसीन, डॉ.पी.सी.कोकिला एवं डॉ. हुसैन वल्ली को हिंदी सेवी सम्मान से नवाजा गया। नीरलकट्टी का सम्मान उनके पुत्र शिवयोगी ने प्राप्त किया। हिंदी विभाग की डॉ. श्रावणी ने समारोह का संचालन किया एवं विभाग के बारे में जानकारी दी। डॉ. ए. फातिमा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राज्यपाल ने साहित्यकार महेन्द्र भीष्म की लिखी पुस्तक मैं पायल के तमिल अनुवाद का विमोचन किया। मद्रास विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. सरस्वती ने पुस्तक का हिंदी से तमिल में अनुवाद किया है।
Published on:
06 Dec 2019 10:50 pm
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