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नए एयरपोर्ट की जमीन के लिए बाजार भाव से 350 प्रतिशत अधिक दाम देने को सरकार तैयार

दूसरे नए एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण कृषि भूमि का अधिग्रहण ही एकमात्र उपाय सरकार 13 गांवों में लोगों को "उनकी शैक्षिक योग्यता के आधार पर" रोजगार के अलावा वैकल्पिक भूमि और उस जमीन पर आवास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी

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नए एयरपोर्ट की जमीन के लिए बाजार भाव से 350 प्रतिशत अधिक दाम देने को सरकार तैयार

कांचीपुरम जिले का परंदूर गांव जहां नया एयरपोर्ट प्रस्तावित है।

चेन्नई. कांचीपुरम जिले के परंदूर गांव में प्रस्तावित दूसरे नए एयरपोर्ट का जमीन अधिग्रहण मामला सुलगने लगा है। स्थानीय काश्तकारों, जनता और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बीच सरकार ने शुक्रवार को अधिग्रहीत जमीन के एवज में वैकल्पिक जमीन के अलावा बाजार मूल्य से साढ़े तीन गुना अधिक भुगतान की पेशकश की है। लोक निर्माण, राजमार्ग और लघु बंदरगाह मंत्री ई.वी. वेलू ने सचिवालय परिसर में संवाददाता सम्मेलन में इस मसले पर कहा कि "लोक हित" में 2013 में अधिनियमित प्रासंगिक कानून के तहत भूमि अधिग्रहण होगा। हमारे पास "कृषि भूमि प्राप्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।"

सरकारी नौकरी, जमीन और वित्तीय मदद

उद्योग मंत्री तंगम तेन्नअरसु और एमएसएमई मंत्री टी. एम. अंबरसन के साथ वेलू ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार इन 13 गांवों में लोगों को "उनकी शैक्षिक योग्यता के आधार पर" रोजगार के अलावा, प्रस्तावित हवाईअड्डा स्थल के पास वैकल्पिक भूमि और उस जमीन पर आवास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

4536 एकड़ जमीन का अधिग्रहण

हवाईअड्डा परियोजना के लिए 13 गांवों की कुल 4,563.56 एकड़ का अधिग्रहण किया जाना है, जिनमें 3,246.38 एकड़ निजी पट्टा जमीन है और शेष 1317.18 एकड़ सरकारी व्यर्थ भूमि है। इस परियोजना से करीब 1,005 घर प्रभावित होंगे।

जन सुनवाई के सुझाव को माना

एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन की गाइडलाइन वैल्यू सर्वेक्षण संख्या के बीच अलग-अलग हो सकती है। कांचीपुरम कलक्ट्रेट में जन सुनवाई के दौरान रखी मांगों के आधार पर सरकार ने जमीन के बाजार मूल्य को साढ़े तीन गुना अधिक मूल्य देने का निर्णय किया है। सुनवाई में बड़ी संख्या में लोगों ने मुआवजे के आधार पर जमीन देने की इच्छा जताई थी।

जलस्रोतों का संरक्षण

प्रस्तावित साइट पर जलस्रोत के बारे में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए वेलू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर आइआइटी मद्रास से परामर्श करेगी। चूंकि मीनम्बाक्कम में मौजूदा हवाईअड्डा 2029 के हवाई यातायात की दृष्टि से अपर्याप्त होगा इसलिए सरकार ने परंदूर में नया एयरपोर्ट विकसित करने का निर्णय किया है। हमारी कोशिश रहेगी कि यह नया एयरपोर्ट बेंगलूरु और हैदराबाद से बेहतर हो। इसके निर्माण में करीब आठ साल लगेंगे।