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Mekedatu Project पर विवाद: PMK का जनजागरूकता मार्च शुरू

चेन्नई में कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेडाटु बांध के विरोध में पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने धर्मपुरी के बिलिगुंडलू से पूम्पुहार तक जनजागरूकता मार्च शुरू किया। उन्होंने इस परियोजना को तमिलनाडु की जल सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया।
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PMK, Mekedatu Project

Mekedatu Project तमिलनाडु की जल सुरक्षा के लिए खतरा: PMK अध्यक्ष अंबुमणि

चेन्नई में कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेडाटु बांध के विरोध में PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने धर्मपुरी के बिलिगुंडलू से पूम्पुहार तक जनजागरूकता मार्च शुरू किया। उन्होंने इस परियोजना को तमिलनाडु की जल सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया।

मार्च का उद्देश्य कर्नाटक सरकार द्वारा इस बांध के निर्माण को रोकना है। इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए अंबुमणि ने कहा यह परियोजना राज्य की जल सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण के लिए बेहद घातक साबित होगी। रामदास ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह बांध के खिलाफ अपनी कानूनी लड़ाई और तीव्र करे। उन्होंने कहा, कावेरी राज्य की जीवनरेखा है। राज्य के पांच करोड़ से अधिक लोग इस नदी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। यदि कर्नाटक यह परियोजना आगे बढ़ाता है तो हमें मिलने वाला सीमित पानी भी प्रभावित होगा, जिससे पेयजल और सिंचाई संकट गहरा जाएगा।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कम पानी की आवश्यकता

उन्होंने कर्नाटक की इस दलील को खारिज किया कि यह परियोजना बेंगलूरु की पेयजल जरूरतों के लिए है। अंबुमणि ने कहा, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कम पानी की आवश्यकता है, जबकि 70 टीएमसी क्षमता का जलाशय आगे चलकर सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है, जिससे हमारे हिस्से का पानी और घट जाएगा। PMK नेता ने पर्यावरणीय चिंता भी जताई। प्रस्तावित स्थल पर करीब 12,500 एकड़ घना जंगल है, जिसमें हाथी, बाघ सहित कई वन्यजीव रहते हैं। कर्नाटक के पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस परियोजना का विरोध किया है।

पीएमके की मांगें और जनसमर्थन की अपील

अंबुमणि ने कर्नाटक की सरकारों पर कावेरी समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया और राज्य सरकार से कानूनी लड़ाई तेज करने की मांग की। उन्होंने नई ट्रिब्यूनल की जरूरत को नकारते हुए मौजूदा कावेरी ट्रिब्यूनल को पर्याप्त बताया। साथ ही, युवाओं और आम जनता से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया, जैसे जल्लीकट्टू आंदोलन के समय हुआ था।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी अनुरोध किया कि वे अंडमान-निकोबार की पर्यावरणीय परियोजनाओं का विरोध करने की तरह मेकेडाटु मुद्दे पर भी हस्तक्षेप करें। यह जनजागरूकता मार्च मुख्य कावेरी सिंचाई क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिसमें पीएमके नेता और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।