
पॉस्को एक्ट : एक दशक पूरा ...सजा के मामले में तमिलनाडु अन्य राज्यों से आगे
चेन्नई. 2012 को संसद ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम पारित किया, जो उसी वर्ष 14 नवंबर को लागू हुआ। १० साल बाद मामलों की रिपोर्टिंग और अभियुक्तों की सजा के मामले में तमिलनाडु अन्य राज्यों से आगे है। हालांकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभी और भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
यह कई विभागों के सहयोग पर निर्भर
पॉक्सो अधिनियम कुछ अन्य कानूनों की तरह एकल निगरानी प्राधिकरण द्वारा शासित नहीं है। इसका कार्यान्वयन सामाजिक रक्षा, स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण इकाइयों, पुलिस, हेल्पलाइन, परामर्शदाताओं, गैर सरकारी संगठनों और न्यायिक प्रणाली सहित कई विभागों के सहयोग पर निर्भर है। न्याय देने में देरी से संबंधित मुद्दों और लोगों की ओर से जागरूकता बढ़ाने में अंतराल के अलावा बच्चों के खिलाफ यौन ङ्क्षहसा की रोकथाम पर अधिक ध्यान देना समय की मांग है। बाल अधिकार कार्यकर्ता ए. देवनियन बताते हैं, यह उचित समय है जब हम रोकथाम के बारे में बात कर सकते हैं। सभी विभागों का सामूहिक कार्य जरूरी है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में अधिनियम पर एक अध्याय होना चाहिए। जो बच्चों को डराने के लिए नहीं बल्कि उन्हें शिक्षित करने के लिए हो।
स्कूल के बाद अच्छी देखभाल रोकथाम की दिशा में अच्छा कदम हो सकता है : विद्या रेड्डी
सेंटर फॉर प्रिवेंशन एंड हीङ्क्षलग ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज (सीपीएचसीएसए) की संस्थापक विद्या रेड्डी ने कहा, लोगों को यौन अपराधों पर चर्चा करने और यौन शिक्षा जैसे विषयों को याद करने में मुश्किल होती है। बच्चों के साथ सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बारे में बात करना ही काफी नहीं है। जिन बच्चों के माता-पिता काम करते हैं, उन्हें आमतौर पर स्कूल के बाद अकेला छोड़ दिया जाता है। स्कूल के बाद अच्छी देखभाल रोकथाम की दिशा में एक कदम हो सकता है।
Published on:
15 Nov 2022 05:02 pm
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