
तुत्तकुडी में बाढ़ ने बंदरगाह को किया प्रभावित, निर्यात पर असर
तुत्तकुडी/चेन्नई.
तमिलनाडु में दक्षिणी जिलों में हुई बारिश की वजह से आलू की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है। इससे आलू के निर्यात में गिरावट आ गई है। खास बात यह है कि बारिश ने कोयम्बत्तूर जिले के मेट्टुपालयम में आलू की फसल को सबसे अधिक प्रभावित किया है। वहीं किसानों का कहना है कि बारिश की वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है। ऐसे में सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए। यहां नीलगिरि, तलवाड़ी, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से उपज बिक्री के लिए लाई जाती है। मेट्टुपालयम जिले में किसान बड़े स्तर पर आलू की खेती करते हैं। यही वजह है कि मेट्टुपालयम को तमिलनाडु में आलू का केंद्र कहा जाता है। यहां से आलू का निर्यात सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी होता है।
विदेशों में निर्यात किया जाता है आलू
व्यापारियों के अनुसार, मेट्टुपालयम से लगभग केरल में 40 प्रतिशत आलू की सप्लाई होती है। इसके बाद 30 फीसदी आलू तमिलनाडु के अलग- अलग बाजारों में भेजा जाता है। वहीं, 30 प्रतिशत आलू तुत्तुकुडी बंदरगाह के माध्यम से श्रीलंका, मालदीव और दुबई निर्यात किया जाता है। यहां औसतन, 2000 टन आलू हर हफ्ते दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। मेट्टुपालयम बाजार के एक व्यापारी आर तिरुमूर्ति ने कहा, तुत्तुकुडी बंदरगाह पर परिचालन बंद होने के कारण कीमत गिर गई है। रविवार को थोड़ी मात्रा में आलू निर्यात के लिए भेजा गया है। मेट्टुपालयम जिले में 70 से अधिक निजी आलू मंडियां हैं। इसके अलावा, नीलगिरिज सहकारी प्रोड्यूसर्स मार्केट सोसायटी भी स्थानीय किसानों से आलू की खरीद कर रही है। यह हर दिन किसानों से औसतन 1200 टन खरीदती है। वहीं, कोटगिरी के पास डेनद के एक किसान आर शिवकुमार ने कहा कि अभी 45 किलो आलू की बोरी की कीमत 1500 रुपए है जबकि, तीन दिन पहले,1050 रुपए बोरी आलू बिक रहा था।850 रुपए आती है उपज की लागत
किसान के मुताबिक, एक बोरी आलू को ऊगाने में इनपुट लागत 850 रुपए आती है। वहीं, आलू मंडी तक ले जाने में भी प्रत्येक बोरी पर 150 रुपए खर्च होते हैं। एक बोरी आलू पर कुल लागत 1000 रुपए आ रही है लेकिन मुनाफा काफी कम हो रहा है। किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
Published on:
26 Dec 2023 03:48 pm
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