
rajasthani samaj
चेन्नई. प्रवासी राजस्थानियों ने व्यवसाय के साथ ही सामाजिक सरोकारों के माध्यम से राजस्थान का नाम देश-विदेश में रोशन किया है। करीब दो सौ साल पहले बैलगाड़ी से दक्षिण की धरा पर पहुंचे राजस्थानी अपनी मेहनत एवं लगन से व्यवसाय की उंचाइयों पर पहुंचे है। खास बात य़ह है कि दक्षिण में रहते हुए भी वे अपनी जड़ों से जुड़े हैं तथा अपनी संस्कृति को जिंदा रखे हैं। राजस्थानी समाज के लोंगों का तामिलनाडु के विकास में दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कोरोना के समय उनकी सेवाएं जगजाहिर रही। बात चाहे रीति-रिवाज, परम्परा या संस्कृति की हो या फिर समाजसेवा की। राजस्थानियों का कोई सानी नहीं है। हजारों किमी दूर रहकर भी वे अपनी जड़ों से भी जुड़े हुए हैं।
एक कहावत है कि जहां न पहुंचे बैलगाड़ी वहां पहुंचे मारवाड़ी। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए मारवाडिय़ों ने अपनी काबिलियत का डंका बजाते हुए न केवल बुलंदियों को छुआ बल्कि देश-विदेश में राजस्थानियों का नाम ऊंचा किया। राजस्थान के लोग जहां भी जाते हैं अपनी मेहनत व लगन से अपना मुकाम हासिल कर लेते हैं। अपनी संस्कृति व सभ्यता सर्वोपरि है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए राजस्थानी काम कर रहे हैं। तमिलनाडु में रहने वाले प्रवासियों के दिल में अपने प्रदेश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हमेशा ही दिल में हिलोरे लेता रहता है। राजस्थानी लोग व्यावसायिक कौशल के साथ ही साहसी एवं निष्ठावान है। कई गुणों को आत्मसात किए राजस्थानी चाहे जन्मभूमि हो या फिर कर्मभूमि सदैव सेवा भावना को सर्वोपरि रखते हैं।
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पुरखों का इतिहास जरूर बताएं
समय रहते अपने बच्चों को मायड़ भाषा का सबक नहीं दिया तो हम महाराणा प्रताप, पन्नाधाय सबको भूल जाएंगे। आने वाले पांच-छह दशक बाद यह सिर्फ कल्पना बनकर रह जाएंगी। ऐसे में नई पीढ़ी को हमारे पुरखों के इतिहास के बारे में जरूर बताएं। प्रवासी राजस्थानी समय-समय पर विभिन्न सुविधाओं के लिए सहयोग देते रहे हैं। जहां-जहां प्रवासी राजस्थानी बसे, वहां आर्थिक तंत्र को मजबूती प्रदान की और बहुत कम समय में अपना स्थान बना लिया।
- शिवनाथसिंह राजपुरोहित, पूर्व अध्यक्ष, श्री रामदेव मंडल, चेन्नई।
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विकास में अहम योगदान
राजस्थान के लोगों में समर्पण व मेहनत की कूवत है। अपने कार्य व्यवहार से आदर्श स्थापित किया है। प्रवासी राजस्थानी अपनी मातृभूमि के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं। प्रवासी राजस्थानियों को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास एवं परम्पराओं का ज्ञान देने की जरूरत है। ताकि नई पीढ़ी भी इससे कुछ प्रेरणा ग्रहण कर सके। राजस्थान के लोग अपनी जन्मभूमि को भी कभी नहीं भूलते। तमिलनाडु के साथ ही राजस्थान के विकास कार्य में उनका योगदान रहा है।
- इन्द्रराज बंसल, समाजसेवी, चेन्नई।
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एक सूत्र में पिरोने का काम
प्रवासी राजस्थानियों को एक सूत्र में पिरोने एवं उनकी आवाज को बुलंद करने में कई संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह संगठन राजस्थान एवं अन्य राज्यों के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। हम राजस्थान में जाकर भी लोगों के सहभागी बनते हैं। लोगों को रीति-रिवाज से जोड़ने के प्रयास लगातार होते रहते हैं। लोगों के सुख-दुख में भागीदार बनते हैं।
- पारस जैन जावाल, राष्ट्रीय महामंत्री, श्री अखिल भारतीय राजस्थानी प्रवासी महासंघ।
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Published on:
18 Dec 2021 11:34 pm
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