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शादी समारोह में राजस्थानी झलक, बैड-बाजों की रौनक, घोड़ी पर दूल्हा

हमारे रिवाज हमारी परम्परा -3शादी समारोह में राजस्थानी झलक- बैड-बाजों की रौनक, घोड़ी पर दूल्हा- पाट बिठाना. मंगल गीत व बंदौली भी

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rajasthani comunity

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चेन्नई.अपनी जन्मभूमि राजस्थान से आकर तमिलनाडु को भले ही कर्मभूमि बनाया है। राजस्थान के लोग यहां रच-बस गए जरुर हैं लेकिन परम्पराओं को आज भी निभा रहे हैं। शादी-समारोह उसी अंदाज व परम्परा के अनुसार य़हां आयोजित कर रहे हैं जैसे राजस्थान में होते रहे हैं। वही बैण्ड-बाजों की स्वर लहरियां यहां भी सुनाई देती है तो घोड़ी पर दूल्हे के साथ बारात में नाचते-गाते बारातियों की रौनक भी देखते ही बनती है। बंदौली का आयोजन हो या फिर महिलाओं का शादी पर मंगल गीत गाने का कार्यक्रम। शादी के इन आयोजनों से यह बिल्कुल भी अहसास नहीं होता कि शादी समारोह राजस्थान से बाहर आयोजित हो रहा है। यहां तक की रिसेप्शन में भी कैर-कुमटियों की सब्जी, दाल-बाटी चूरमा से लेकर राजस्थान के लजीज व्यंजनों की भरमार रहती है। शादी के समय राजस्थानी वेशभूषा की झलक भी दिखती है। अपणायत की संस्कृति यहां साफ दिखाई देती है।
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दिखावा अधिक होने लगा है
तमिलनाडु में निवास कर रहे राजस्थान मूल के 90 फीसदी जैन परिवार आज तमिलनाडु में ही विवाह समारोह आयोजित कर रहे हैं। यह जरूर है कि कुछ परिवार डेस्टिनेशन के चलते राजस्थान के जोधपुर, उदयपुर, कुंभलगढ़ समेत अन्य स्थलों पर शादी-समारोह करने लगे हैं। बहुत कम लोग हैं जो अपने पैतृक गांव जाकर शादी करते हैं। हालांकि पहले के रिवाज में पैतृक गांव में ही शादी होने से समूचे कुटुम्ब को एक ही जगह मिलने का अवसर मिल जाता था। क्योंकि अधिकांश सावे समान दिन होते हैं। साथ ही शादी कम खर्च में हो जाती थी। अब अलग-अलग जगह शादियां होने के कारण भी लोग सभी शादियों में पहुंच नहीं पाते हैं। दूसरा शादियों में दिखावा व फिजुलखर्ची अधिक होने लगी है। हालांकि शादियां पूरी रीति- रिवाज के अनुसार ही हो रही है। अब सामूहिक विवाह आयोजन पर भी विचार किया जाने लगा है।
- कांतिलाल संघवी, राजस्थान के सिरोही जिले के कैलाशनगर मूल के।
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झलक राजस्थान की
राजस्थान मूल के तमिलनाडु में निवास कर रहे अधिकांश परिवार शादी समारोह तमिलनाडु में ही कर रहे हैं। इसका एक कारण यह भी है वर-वधु दोनों पक्षों के परिवार यहीं होने से विवाह समारोह में आसानी भी रहती है। हालांकि डेस्टिनेशन शादी का चलन इन दिनों बढ़ रहा है। जालोर-सिरोही में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां प्रवासी अपने पैतृक गांव जाकर ही विवाह समारोह का आयोजन करते हैं। तमिलनाडु में विवाह समारोह में रीति-रिवाज उसी तरह के रहते हैं जैसे राजस्थान में शादी के समय होते है। बन्दौली, बारात स्वागत, रिसेप्शन समेत अन्य आयोजन में राजस्थानी परम्परा की झलक देखने को मिल रही है। घोड़ी पर दूल्हा, बैंण्ड-बाजे, मंगल गीत भी होते हैं।
- प्रवीण टाटिया, सदस्य, अल्पसंख्यक आयोग, तमिलनाडु।
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जैन विधि के अनुसार विवाह
राजस्थान मूल के लोग भी आजकल विवाह समारोह तमिलनाडु मे ही करने लगे हैं। हालांकि इन शादी-समारोह में राजस्थान की कला व संस्कृति की पूरी झलक जरूर देखने को मिलती है। अधिकांश परिवार जैन विधि के अनुसार ही विवाह समारोह का आयोजन करते हैं। यह जरूर है कि आजकल अरैंज मैरिज कम होने लग गई है। इसका कारण बच्चों को अधिक फ्रीडम देना है। आजकल की पीढ़ी शादी के लिए भी खुद डिसीजन मेकर बन चुकी है। वैसे कोरोना के चलते भी इन दो वर्षों में लोग राजस्थान न जाकर तमिलनाडु में ही विवाह समारोह करने को प्राथमिकता दी।
- आनन्द सुराणा, सचिव, सुराणा जैन विद्यालय, साहुकारपेट, चेन्नई।
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