
चेन्नई.
अरक्कोणम में विराजित साध्वी सिद्धिसुधा ने अपने प्रवचन में फरमाया कि समझ के सम्यक बने बिना साधना का शुभारंभ नहीं होता है। समझ सम्यक बनने के तीन बिन्दु हैं। आत्म साधना करने से, सत्साहित्य का पठन करने से तथा संतों के सान्निध्य में बैठने से समझ सम्यक बनती है। यदि सम्यक समझ न हो तो छोटी समस्या भी बहुत बड़ी बन जाती है। धार्मिक क्षेत्र के साथ साथ व्यवहारिक क्षेत्र में भी सम्यक समझ अनिवार्य है। धार्मिक क्षेत्र के साथ साथ व्यवहारिक क्षेत्र में भी सम्यक समझ अनिवार्य है। साध्वी सुविधी ने अपनी वाणी को तोलकर बोलने का संदेश दिया। शब्दों का प्रयोग ऐसा हो कि लोग आपके बोलने का इंतजार करें। वाणी मिठी हो तो सबके दिलों को जीत सकते हैं। मीठे वचनों से ही रिश्तों की डोर को और मजबूत बनाया जा सकता है। प्रवचन में नेहरू बाजार, चेन्नई तथा संघीय अध्यक्ष इन्दरचंद धारीवाल, सचिव जयचंद कटारिया समेत श्रावक श्राविका उपस्थित थे।
Updated on:
25 Apr 2019 06:02 pm
Published on:
25 Apr 2019 06:02 pm
