
Sadhana of Hindi in Hindi sector
चेन्नई।हिंदीतर क्षेत्र में रहते हुए हिंदी की साधना तथा भाषा एवं साहित्य के संस्कार को बचाए रखना बड़ी बात है। साहित्यकार रमेश गुप्त नीरद उन्हीं लोगों में से हैं जिन्होंने हिंदीतर क्षेत्र में हिंदी को पहचान दिलाई है। वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने यह बात कही। वे रविवार को डी.जी.वैष्णव महाविद्यालय में वरिष्ठ साहित्यकार रमेश गुप्त नीरद की दो पुस्तकों के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
महाविद्यालय के हिंदी विभाग एवं साहित्यिक संस्था अनुभूति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अक्सर हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी भाषी हासिए पर रहते हैं लेकिन नीरद ने अपनी लेखनी के दम पर हिंदी को दशा व दिशा दी है। नीरद ने बिना किसी लाग-लपेट के साहित्य का सृजन किया है। वे संत साहित्यकार की बजाय फकीराना अंदाज में लिखने वाले साहित्यकार है। दक्षिण में हिंदी को जीवित रखने वाले लोग निसंदेह सम्मान के पात्र है।
पुस्तकों के लेखक साहित्यकार रमेश गुप्त नीरद ने कहा, पुस्तकों के प्रकाशन की योजना उनकी सुपुत्री डॉ. सुनीता जाजोदिया की ही उपज है। नीरद ने कहा कि यह पुस्तक उनके लेखन का अंत नहीं है। वे निरंतर इसी तरह आगे भी लिखते रहेंगे। जब संतुष्टि हो जाती है तब लेखक की मौत हो जाती है। लेखक को हमेशा श्रेष्ठता की ओर अग्रसित रहना चाहिए।
समारोह के विशिष्ट अतिथि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलसचिव प्रोफेसर प्रदीप शर्मा ने कहा कि रमेश गुप्त नीरद ने कच्ची मिट्टी के माध्यम से बच्चों में सृजनात्मकता को आगे ले जाने में योगदान दिया है। बच्चे कोमल मन होते हैं और उन्हें जैसी दिशा देंगे वे उसी ओर प्रवृत्त हो जाएंगे। नीरद ने इन बच्चों को लेखनी के माध्यम से सही मार्गदर्शन किया है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि राजस्थान पत्रिका चेन्नई के संपादकीय प्रभारी डॉ.पी.एस. विजयराघवन ने कहा कि रमेश गुप्त नीरद ने सही मायने में साहित्य की सेवा की है। उम्र के इस पड़ाव में भी उनकी लेखनी बेबाक बनी हुई है। साहित्य की धार को मजबूत करने में उनका योगदान निसंदेह सराहनीय है। डॉ. सुनीता जाजोदिया ने नीरद की पुस्तकों के बारे में प्रकाश डाला। गीतकार ईश्वर करुण ने नीरद के साहित्य में दिए योगदान को रेखांकित किया। अनुभूति के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान जैन ने स्वागत भाषण दिया। समारोह का संचालन अनुभूति के महासचिव गोविन्द मूंदड़ा ने किया।
प्रोफेसर बी.एल. आच्छा, डॉ. मंजू रुस्तगी एवं डॉ. मनोजकुमार सिंह ने अतिथियों का परिचय दिया। मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। डी.जी. वैष्णव महाविद्यालय के सचिव अशोक मूंदड़ा भी मंच पर मौजूद थे। अनुभूति के विकास सुराणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में कई साहित्यकार, लेखक, शिक्षक, कवि एवं हिंदीप्रेमी मौजूद थे।
Published on:
11 Feb 2019 12:58 am
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